प्याज और सब्जियों सहित अन्य खाद्य उत्पादों की महंगाई ने 2019 में पूरे साल उपभोक्ताओं को रुलाया। एक समय 200 रुपये किलो तक पहुंच गई। प्याज की कीमत ने जनता के साथ सरकार को भी विचलित कर दिया। इसके बाद आखिरी तिमाही में टमाटर के भाव भी आसमान पर पहुंच गए, जिससे खुदरा महंगाई दर तीन साल में सबसे ज्यादा हो गई।
सरकार ने प्याज कीमतों पर अंकुश के प्रयास देरी से शुरू किए। घरेलू बाजार में कीमतें नीचे लाने के लिए प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि विक्रेताओं के लिए स्टॉक की मात्रा घटाकर चौथाई कर दी गई। इन कदमों का थोड़ा असर तो हुआ लेकिन अभी तक प्याज के भाव आसमान पर हैं। इस महंगाई का असर आरबीआई के रेपो रेट तय करने पर भी पड़ा और उसने दिसंबर में उम्मीदों को झटका देते हुए दरें स्थिर रखीं। रिजर्व बैंक ने स्वीकार भी किया कि प्याज की ऊंची कीमतों के दबाव में इस बार रेपो रेट नहीं घटाया है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा की अर्थशास्त्री अदिति नायर ने अनुमान जताया है कि 2020 की शुरुआत में सब्जियों के दाम काफी हद तक काबू में आ जाएंगे। नायर ने कहा, भूजल की बेहतर स्थिति और जलाशयों में पानी के अच्छे स्तर की वजह से रबी के उत्पादन और मोटे अनाजों की प्रति हेक्टेयर उपज अच्छी रहेगी। हालांकि, सालाना आधार पर रबी दलहन और तिलहन की बुवाई में जो कमी आई है, वह चिंता का विषय है। बावजूद इसके आयातित प्याज और नई फसल के आने से कीमतों में गिरावट की उम्मीद है। इक्रा का अनुमान है कि दिसंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.8-6 फीसदी तक हो सकती है।