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Inflation: साबुन, तेल, बिस्किट... महंगे हो सकते हैं; मार्जिन घटने से परेशान FMCG कंपनियां बढ़ा सकती हैं दाम

Mon, 04 Nov 2024 02:36 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

महंगाई के मोर्चे पर चिंताजनक खबर है। आम जनता को अपनी जेब अधिक ढीली करनी पड़ेगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों में साबुन, तेल और बिस्किट जैसे उत्पाद महंगे हो सकते हैं। कीमतों में तेजी से उपभोक्ताओं के बजट पर भी असर पड़ रहा है।
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एफएमसीजी उत्पादों के महंगे होने की आशंका - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खाद्य पदार्थों की कीमतों मे तेजी से आने वाले समय में साबुन, तेल और बिस्किट जैसे एफएमसीजी उत्पाद महंगे हो सकते हैं। कंपनियों का कहना है कि सितंबर तिमाही में उनको चुनौतीपूर्ण का सामना करना पड़ा, क्योंकि बढ़ती इनपुट लागत और खाद्य महंगाई के कारण मार्जिन घट गया। इससे शहरी खपत धीमी हो गई। मैरिको ने मुद्रास्फीति के दबाव से निपटने के लिए सफोला तेल जैसे उत्पादों की कीमतें बढ़ा भी दी है।
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खाद्य पदार्थों की महंगाई से एफएमसीजी कंपनियों के में गिरावट
कंपनियों के मुताबिक, पाम तेल, कॉफी और कोको जैसे उत्पादों के लिए कमोडिटी की कीमतें बढ़ गई हैं। ऐसे में आगामी समय में कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लि. गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, मैरिको, आईटीसी और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स सहित प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों की सितंबर तिमाही में शहरी बिक्री घट गई है। एफएमसीजी बिक्री में शहरी सेगमेंट कुल खपत का 65-68% फीसदी योगदान करता है।

हाल में गोदरेज कंज्यूमर के प्रबंध निदेशक और सीईओ सुधीर सीतापति ने कहा, हम मूल्य वृद्धि और लागत के स्थिरीकरण के माध्यम से मार्जिन की वसूली करेंगे। पाम तेल के दाम में तेजी के कारण मार्जिन पर असर पड़ा है। डाबर ने कहा, शहरी बाजारों में नरमी आई है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि जारी है।
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डाबर के मुनाफे व राजस्व में गिरावट
डाबर के मुताबिक, शहरी मांग में कमी और खाद्य महंगाई के दबाव से सितंबर तिमाही सही नहीं रही है। कंपनी का शुद्ध लाभ 17.65 फीसदी गिरकर 418 करोड़ रुपये और राजस्व 5.46 फीसदी घटकर 3,029 करोड़ रुपये रह गया।

उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ रहा है असर
नेस्ले इंडिया के चेयरमैन और एमडी सुरेश नारायणन ने कहा, मध्यम वर्ग के उपभोक्ता उच्च महंगाई का खामियाजा भुगत रहे हैं। इससे उनके बजट पर असर पड़ रहा है। कुछ तिमाही पहले खाद्य एवं पेय सेक्टर में दो अंकों में वृद्धि होती थी, अब यह घटकर दो प्रतिशत के अंदर रह गई है। नेस्ले की घरेलू बिक्री में 0.94% की कमी आई है। प्रथम स्तर के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग स्थिर बनी हुई है। दबाव मुख्य रूप से महानगरों और बड़े शहरों में देखा गया है।

खाद्य महंगाई का असर ज्यादा है
टाटा कंज्यूमर के एमडी और सीईओ सुनील डिसूजा ने कहा, मुद्रास्फीति ने शहरी खर्च को प्रभावित किया है। खाद्य महंगाई हमारी सोच से अधिक है और इसका प्रभाव भी ज्यादा दिख रहा है। एचयूएल के सीईओ रोहित जावा ने कहा, एफएमसीजी बाजार की वॉल्यूम वृद्धि कम हो गई है। शहरी विकास में गिरावट आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी बिक्री है। मैरिको का मानना है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण मांग दोगुनी गति से बढ़ रही है। भारी बारिश, खाद्य महंगाई और इनपुट लागत बढ़ने से आईटीसी के मार्जिन में भी थोड़ी गिरावट आई है।
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