अनिल प्रकाश, महानिदेशक, एसआईए-इंडिया ने बताया कि विधेयक उपग्रह स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है, जो निष्पक्ष और पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर जोर देता है।
लोकसभा में पेश दूरसंचार विधेयक का उद्योग जगत ने स्वागत किया है। सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने कहा, दूरसंचार विधेयक अच्छी तरह से परिभाषित राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) ढांचे के जरिये मजबूत दूरसंचार नेटवर्क के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। यह गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से आरओडब्ल्यू देने के साथ दूरसंचार नेटवर्क को संपत्ति कर, लेवी, उपकर और शुल्क से छूट देना सुनिश्चित करता है। इसमें केंद्र सरकार के अधिकृत अधिकारी के आदेश के बिना मनमाने ढंग से शटडाउन/सीलिंग की रक्षा करने, केबल कॉरिडोर स्थापित करने, जिम्मेदार आवेदन प्रक्रिया और कुशल विवाद समाधान तंत्र पर जोर दिया गया है। खास बात है कि इस तरह के सकारात्मक उपायों से देश के हर नागरिक तक डिजिटल कनेक्टिविटी का लाभ पहुंचाने में काफी तेजी आएगी।
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एके भट्ट, महानिदेशक, भारतीय अंतरिक्ष संघ ने बताया कि उपग्रह आधारित संचार नेटवर्क में बहुत अधिक क्षमता है, जो भारत को डिजिटल व विकसित अर्थव्यवस्था में बदल सकती है। सैटकॉम के लिए प्रशासनिक पद्धति से स्पेक्ट्रम आवंटित कर भारत खुद को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बना सकता है। इससे वैश्विक उपग्रह बाजार में देश की स्थिति मजबूत होगी।
निष्पक्ष-पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर जोर
अनिल प्रकाश, महानिदेशक, एसआईए-इंडिया ने बताया कि विधेयक उपग्रह स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है, जो निष्पक्ष और पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर जोर देता है। भारतीय इंटरनेट एवं मोबाइल संघ ने कहा कि इंटरनेट आधारित संचार व प्रसारण सेवाओं, मशीन से मशीन व ओटीटी संचार सेवाओं को बाहर रखना सराहनीय है। पराग कर, दूरसंचार विशेषज्ञ व स्वतंत्र सलाहकार ने कहा कि उपग्रह और बैकहॉल जैसी सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर लंबे समय से चली आ रही दुविधा को साफ करता है।