भारत में तय कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए कर्मचारी हर महीने औसतन 785 रुपये खर्च करते हैं। सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में कर्मचारियों का आने-जाने का खर्च ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले काफी अधिक है। शहरों में कर्मचारी हर महीने औसतन 1,044 रुपये, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 612 रुपये खर्च करते हैं।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने पहली बार राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण के प्रमुख संकेतक और निष्कर्ष जारी किए हैं। यह सर्वेक्षण जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किया गया।
शहरी और ग्रामीण छात्रों के शिक्षण संस्थान जाने के खर्च में भी बड़ा अंतर
सर्वेक्षण में एक यात्रा के लिए एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने को आधार माना गया है। आंकड़ों के अनुसार, तय कार्यस्थल तक आने-जाने में पुरुष कर्मचारी हर महीने औसतन 835 रुपये खर्च करते हैं। महिला कर्मचारियों का औसत खर्च 533 रुपये है। शिक्षा के लिए आने-जाने में भी शहरों और गांवों के बीच अंतर दिखाई देता है। शहरी छात्र शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने में हर महीने औसतन 617 रुपये खर्च करते हैं, जबकि ग्रामीण छात्रों का औसत खर्च 361 रुपये है।
सर्वेक्षण के अनुसार, करीब 57.6 प्रतिशत कर्मचारी काम पर जाने के लिए एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करते हैं। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के आधे से ज्यादा कर्मचारी एक दिन के भीतर तय या गैर तय कार्यस्थल तक आने-जाने वाली यात्राएं करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 54.5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 64.1 प्रतिशत है।
कर्मचारियों की पहली पसंद है दोपहिया वाहन
राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में औसत यात्रा समय करीब 20 से 23 मिनट है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में यात्रा का समय इससे अधिक दर्ज किया गया है। देशभर में करीब 61.9 प्रतिशत पुरुष कर्मचारी रोजाना काम के लिए एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करते हैं। महिलाओं में यह आंकड़ा 41.9 प्रतिशत है।
कर्मचारियों के लिए दोपहिया वाहन देश में आने-जाने का सबसे प्रमुख साधन है। ग्रामीण क्षेत्रों में 37.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 52.3 प्रतिशत कर्मचारी प्राथमिक रूप से दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। शहरी क्षेत्रों में कुल कर्मचारी यात्राओं में एकल रेल, मेट्रो, उपनगरीय रेल और ट्राम की हिस्सेदारी करीब 5 प्रतिशत है। हालांकि महाराष्ट्र में इन साधनों का इस्तेमाल 20.7 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 16.5 प्रतिशत और दिल्ली में 14.4 प्रतिशत दर्ज किया गया।
करीब 83 फीसदी कर्मचारी आधे घंटे से कम समय में पूरी कर लेते हैं यात्रा
करीब 83.4 प्रतिशत कर्मचारी आधे घंटे से कम समय में अपनी यात्रा पूरी कर लेते हैं। तय कार्यस्थल तक 30 मिनट के भीतर पहुंचने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में 86.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 79.3 प्रतिशत है। करीब 13.7 प्रतिशत कर्मचारियों को 30 से 60 मिनट लगते हैं।
तय कार्यस्थल तक जाने वाले कर्मचारियों की औसत यात्रा अवधि 25 मिनट है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 23 मिनट और शहरी क्षेत्रों में 27 मिनट है। छात्रों के लिए यात्रा का औसत समय 23 मिनट है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 23 मिनट और शहरी क्षेत्रों में 22 मिनट दर्ज किया गया। करीब 86.6 प्रतिशत ग्रामीण और 89.6 प्रतिशत शहरी छात्र 30 मिनट के भीतर अपने शिक्षण संस्थान पहुंच जाते हैं।
कितने प्रतिशत छात्र रोज एक किमी से ज्यादा दूरी तय करते हैं?
लगभग 66.4 प्रतिशत छात्र रोजाना एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके शिक्षण संस्थानों तक पहुंचते हैं। छह वर्ष और उससे अधिक उम्र के करीब दो तिहाई छात्र अपनी बुनियादी शिक्षा के संस्थान तक पहुंचने के लिए कम से कम एक किलोमीटर की यात्रा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 65.6 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 68.1 प्रतिशत है।
एक किलोमीटर से कम दूरी की यात्राओं को सर्वेक्षण में दर्ज नहीं किया गया। पूर्वोत्तर राज्यों, जिनमें असम और उसके आसपास के राज्य शामिल हैं, में यात्रा का समय अपेक्षाकृत कम रहा। यहां औसत यात्रा समय 15 से 19 मिनट के बीच दर्ज किया गया। 15 से 29 वर्ष की उम्र के छात्रों में नियमित यात्रा की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। ग्रामीण क्षेत्रों में इस आयु वर्ग के 79.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 73.3 प्रतिशत छात्र रोजाना शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने की यात्रा करते हैं।
कितने छात्र पैदल जाते हैं स्कूल?
स्कूली छात्रों में करीब 37 प्रतिशत पैदल स्कूल जाते हैं। इसके बाद 29.5 प्रतिशत छात्र बस और 15.8 प्रतिशत छात्र साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। कुल छात्रों में 10.5 प्रतिशत आने-जाने के लिए ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल करते हैं। शहरी क्षेत्रों में यह हिस्सेदारी बढ़कर 14.4 प्रतिशत हो जाती है। दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल कुल छात्रों में 6.7 प्रतिशत और शहरी छात्रों में 11.5 प्रतिशत है।
रात में ठहरने वाली लंबी यात्राओं के लिए बस और रेल सबसे प्रमुख साधन हैं। करीब 73.5 प्रतिशत ऐसी यात्राएं बस और रेल से की जाती हैं। इनमें बस की हिस्सेदारी 55.8 प्रतिशत और अंतरशहरी रेल की हिस्सेदारी 17.7 प्रतिशत है। रात में ठहरने वाली यात्राओं के लिए कार का इस्तेमाल 15.1 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल 8.8 प्रतिशत मामलों में होता है।
शहरी परिवारों में करीब 22.7 प्रतिशत रात की यात्राओं के लिए रेल का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण परिवारों में ऐसी यात्राओं के लिए रेल का इस्तेमाल करीब 14 प्रतिशत है, जबकि शहरी परिवारों में यह आंकड़ा करीब 22.7 प्रतिशत है।