भारत सरकार ने सोमवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स का सिरे से खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ट्रांजिट लेवी लगाने के विषय पर भारत और ईरान के बीच बातचीत हो रही है। सरकार ने इन दावों को पूरी तरह निराधार और आधारहीन बताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अहम जानकारी साझा की।
नौवहन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि ट्रांजिट लेवी के विषय पर ईरान के साथ भारत की कोई बातचीत नहीं हुई है। क्षेत्र में बढ़े हुए भू-राजनीतिक तनाव के बीच चिंताओं को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे किसी घटनाक्रम की जानकारी नहीं है।
ऊर्जा के मोर्चे पर स्थिति का आकलन करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि एलपीजी के आयात में थोड़ी गिरावट देखी गई है, जबकि घरेलू उत्पादन भी सीमित स्तर पर है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि इस कमी को पाटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
बाजार की मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने जो नीतिगत कदम उठाए हैं, वे इस प्रकार हैं:
इस बीच, पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट का असर लोगों की आवाजाही पर भी पड़ा है। विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर. महाजन ने बताया कि इस क्षेत्र में तेजी से बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के कारण 28 फरवरी से अब तक लगभग 7.3 लाख भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं। यात्रियों की सुरक्षित और सुगम आवाजाही की सुविधा के लिए सोमवार को कतर एयरवेज भारत के लिए आठ से 10 उड़ानों का संचालन कर रहा है।