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तेल की कीमतों पर राहत संभव: इस बड़ी डील पर भारत-रूस में चर्चा जारी, पेट्रोलियम मंत्री ने कही ये बड़ी बात

Fri, 29 Apr 2022 05:24 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रमुख भारतीय और रूसी तेल कंपनियों के बीच जोे बातचीत हो रही है। उसके तहत आईओसी प्रति माह 60 लाख बैरल तेल आयात करने को लेकर चर्चा कर रहा है, जबकि बीपीसीएल और एचपीसीएल क्रमश: 40 लाख बैरल और 30 लाख बैरल के मासिक आयात का लेकर बातचीत कर रहे हैं। 
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कच्चा तेल - फोटो : pixabay
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विस्तार
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तेल की महंगी कीमतों की मार झेल रही देश की जनता को राहत मिल सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से किफायती तेल का आयात करने के लिए भारत और रूस के बीच बातचीत चल रही है। इस डील पर मुहर लगती है तो फिर देश में आने वाले महीनों में कीमतों में कमी आने की संभावना है।

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छह महीने के तेल सौदे पर बातचीत
रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिफाइनर रूस के साथ छह महीने के तेल सौदे पर बात कर रहे हैं। इसमें सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रूसी कंपनी रोसनेफ्ट, भारत और चीन की कंपनियों से आपूर्ति सौदों पर चर्चा कर रहा है। भारत की शीर्ष रिफाइनर इंडियन आयल कार्प (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कार्प और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प की रूसी कंपनी रोसनेफ्ट के बात हो रही है। 

भारतीय तेल कंपनियों की ये तैयारी
इसमें बताया गया कि आईओसी प्रति माह 60 लाख बैरल तेल आयात करने को लेकर चर्चा कर रहा है, जबकि बीपीसीएल और एचपीसीएल क्रमश: 40 लाख बैरल और 30 लाख बैरल के मासिक आयात का लेकर बातचीत कर रहे हैं। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और दुनिया में तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है। 
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दो महीने में भारत ने दोगुना तेल खरीदा
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूस से और अधिक कच्चे तेल का आयात कर रहा है। भारत ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से दो महीनों में रूस से दोगुने से अधिक कच्चा तेल की खरीद की है। भारतीय और चीनी तेल कंपनियों के साथ रूसी तेल कंपनियों की चर्चा दसअसल, रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच हो रही है, जबकि रूसी कच्चे तेल कीमतें काफी गिर गई हैं। 

पेट्रोलियम मंत्री ने दोहराई अपनी बात
इस बीच भारतीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक बार फिर अपनी बात को दोहराते हुए गैर-भाजपा शासित राज्यों पर निशाना साधा है। शुक्रवार को पुरी ने कहा कि गैर-भाजपा शासित राज्य जितना वैट लगा रहे हैं, उसका आधा वैट भाजपा शासित राज्यों में लगाया गया है। पेट्रोल की कीमतों में भाजपा और गैर-भाजपा शासित राज्यों में 15 से 20 रुपये का अंतर है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर केंद्र पहले 32 रुपये का एक्साइज शुल्क लेता था, जिसमें कटौती की गई है। केंद्र ने अपनी जिम्मेदारी ली है, अब राज्यों को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

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