भारतीय मोबिलिटी उद्योग का आकार 2030 तक दोगुना होकर 600 अरब डॉलर को पार कर सकता है। गूगल और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक, शेयर्ड और कनेक्टेड मोबिलिटी जैसे उभरते आय स्रोत 100 अरब डॉलर का योगदान करने के लिए तैयार हैं, जो स्वच्छ, टिकाऊ गतिशीलता की ओर एक मजबूत कदम का संकेत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की लोकप्रियता बढ़ रही है, हर तीन में से एक ग्राहक अगली नई गाड़ी की खरीद के लिए ईवी के विकल्प पर विचार कर रहा है। कंपनियों को भारत के मोबिलटी ग्राहकों की तेजी से विकसित हो रही प्राथमिकताओं को पहचानना चाहिए। ईवी, डिजिटल और आर्टिफिशियल में वैश्विक नवाचार का प्रभावी ढंग से उपयोग करना कंपनियों के लिए अब महत्वपूर्ण हो गया है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर चुनौतियां
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बारे में कुछ चुनौतियां हैं, जैसे कि चार्जिंग स्टेशनों की कमी, वाहनों की ऊंची कीमत, बैटरी का जीवन और कुछ चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल्स के बारे में चिंता।देखा जाए तो इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, एक तिहाई उपभोक्ता अपनी अगली कार या बाइक के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर विचार कर रहे हैं।
इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहन
इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहन खरीदने वाले ग्राहक उन्नत तकनीक और स्टाइल को प्राथमिकता देते हैं, जबकि दो पहिया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदार आराम, व्यावहारिकता और कीमत को ज्यादा महत्व देते हैं। साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में महिलाओं की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत हो गई है, जो पहले केवल 38 प्रतिशत थी।
इसके अलावा, भारत में लोग अपनी कारों में इन्फोटेनमेंट, पार्किंग सहायता और सुरक्षा जैसी सुविधाओं की मांग करते हैं। कुल मिलाकर, भारतीय मोबिलिटी उद्योग में इलेक्ट्रिक वाहनों और कनेक्टेड सुविधाओं की ओर एक बड़ा बदलाव आ रहा है, और यह बाजार तेजी से विकसित हो रहा है।