GST संग्रह का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये के पार
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह का आंकड़ा अक्तूबर में 1.05 लाख करोड़ रुपये रहा है। फरवरी के बाद पहली बार जीएसटी संग्रह का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये के पार गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से रविवार को यह जानकारी दी गई। वित्त मंत्रालय ने बताया कि 31 अक्तूबर, 2020 तक दाखिल किए गए कुल जीएसटीआर-3बी रिटर्न की संख्या 80 लाख पर पहुंच गई है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अक्तूबर, 2020 में कुल जीएसटी संग्रह 1,05,155 करोड़ रुपये रहा।
इसमें सीजीएसटी का हिस्सा 19,193 करोड़ रुपये, एसजीएसटी का 5,411 करोड़ रुपये, आईजीएसटी का 52,540 करोड़ रुपये (इसमें वस्तुओं के आयात पर 23,375 करोड़ रुपये का संग्रह भी शामिल है) और 8,011 करोड़ रुपये का उपकर (932 करोड़ रुपये आयातित वस्तुओं पर) शामिल है।
अक्तूबर, 2020 में जीएसटी संग्रह पिछले साल के समान महीने से दस फीसदी अधिक रहा है। अक्तूबर, 2019 में जीएसटी संग्रह 95,379 करोड़ रुपये रहा था। कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से जीएसटी संग्रह का आंकड़ा लगातार कई माह तक एक लाख करोड़ रुपये के स्तर से नीचे रहा था।
वाहन क्षेत्र में नियुक्तियों में सुधार जारी
भारत के वाहन क्षेत्र में नियुक्तियों में सुधार जारी है और सितंबर महीने में इसमें 29 फीसदी की क्रमिक वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह अब भी कोरोना वायरस महामारी से पहले के स्तर से नीचे है। रोजगार संबंधी ऑनलाइन सेवाएं देने वाले पोर्टल नौकरी डॉट कॉम ने इसकी जानकारी दी। कंपनी ने एक बयान में कहा कि जून, 2020 से ही सकारात्मक रुख बना हुआ है और माह-दर-माह सुधार हो रहा है।
उसने कहा, 'जब हम कोविड से पहले और बाद के इस क्षेत्र के प्रदर्शन के स्तर की तुलना करते हैं, इसमें स्पष्ट सुधार दिखता है। हालांकि, यह अब भी कोविड से पहले के स्तर की तुलना में सितंबर में 25 फीसदी नीचे बना हुआ है।' इस साल अप्रैल में यह कोविड से पहले के स्तर से 80 फीसदी नीचे था। कंपनी ने कहा कि नियुक्तियों में पिछले कुछ महीने में क्रमिक सुधार हुआ। यह अगस्त में कोविड पूर्व स्तर से 42 फीसदी नीचे था।
उत्पादन में 13 साल की सबसे तेज वृद्धि
देश की विनिर्माण गतिविधियों में अक्तूबर में लगातार तीसरे महीने सुधार हुआ है। सोमवार को जारी एक मासिक सर्वे के अनुसार बिक्री में सुधार के बीच कंपनियों के उत्पादन में 13 साल की (अक्तूबर, 2007 के बाद) सबसे तेज वृद्धि हुई है। आईएचएस मार्किट इंडिया का विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) अक्तूबर में बढ़कर 58.9 पर पहुंच गया, जो सितंबर में 56.8 था। यह क्षेत्र की सेहत में पिछले एक दशक से अधिक का सबसे अच्छा सुधार है। लगातार 32 माह तक वृद्धि दर्ज करने के बाद अप्रैल में इस सूचकांक में गिरावट आई थी। पीएमआई के 50 से ऊपर होने का मतलब गतिविधियों के विस्तार से और 50 से नीचे होने का मतलब संकुचन से होता है।
आईएचएस मार्किट की इकनॉमिक्स एसोसिएट निदेशक पोलीअन्ना डे लीमा ने कहा, 'भारतीय विनिर्माताओं के पास नए ऑर्डर आ रहे हैं और उत्पादन में भी कोविड-19 की वजह से पैदा हुई अड़चनों के बाद सुधार हो रहे हैं। अक्तूबर के पीएमआई आंकड़ों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।' आगे के साल के लिए उत्पादन परिदृश्य में सुधार हुआ है। कंपनियों को उम्मीद है कि कोविड-19 के मामले घटने तथा अन्य कारोबार क्षेत्रों के खुलने से उत्पादन में अच्छी वृद्धि दर्ज होगी।
ऑटोमोबाइल सेक्टर: अक्तूबर में बढ़ी वाहनों की बिक्री
ऑटोमोबाइल सेक्टर की बात करें, तो अक्तूबर में वाहनों की बिक्री में बढ़त दर्ज की गई। ग्राहकों के बीच खरीदारी धारणा में सुधार और मांग बढ़ने से देश की दो प्रमुख कार कंपनी मारुति सुजुकी और ह्यूंदै मोटर्स की बिक्री में इस दौरान दहाई अंक की वृद्धि दर्ज की गई। होंडा कार्स इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और महिंद्रा एंड महिंद्रा की घरेलू बिक्री में भी अक्तूबर में बढ़त रही। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) की घरेलू बिक्री अक्तूबर 2020 में 19.8 फीसदी बढ़कर 1,72,862 इकाई पर पहुंच गई, जो अक्तूबर 2019 में 1,44,277 इकाई थी।
देश की दूसरी बड़ी कार कंपनी ह्यूंदै मोटर ने पिछले महीने 56,605 कार की बिक्री की। यह अक्तूबर 2019 की 50,010 वाहन की बिक्री से 13.2 फीसदी अधिक है। इससे पहले कंपनी की सर्वाधिक मासिक बिक्री अक्तूबर 2018 में 52,001 वाहन थी। कंपनी के निदेशक (बिक्री, विपणन एवं सेवा) तरुण गर्ग ने कहा, 'अक्तूबर महीने की बिक्री ने पूरी कारोबारी धारणा के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया है। कंपनी अर्थव्यवस्था, समुदाय एवं सेवा की टिकाऊ वृद्धि में ठोस योगदान देती रहेगी।' होंडा कार्स इंडिया की थोक घरेलू बिक्री अक्तूबर में 8.3 फीसदी बढ़कर 10,836 वाहन रही। पिछले साल इसी माह में कंपनी ने 10,010 कारों की बिक्री की थी।
अक्तूबर में 13.38 फीसदी बढ़ी बिजली खपत
देश में बिजली की खपत इस साल अक्तूबर में 13.38 फीसदी बढ़कर करीबी 111 अरब यूनिट हो गई। इसकी बड़ी वजह औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों की ओर से बिजली की मांग बढ़ना है। बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर में देश की बिजली खपत 110.94 अरब यूनिट रही। पिछले साल अक्तूबर में यह आंकड़ा 97.84 अरब यूनिट था। पिछले महीने विशेषज्ञों ने अक्तूबर में बिजली खपत में दोहरे अंक की वृद्धि की संभावना जताई थी। उन्होंने आधे महीने के आंकड़ों का आकलन कर यह अनुमान जताया था।
पिछले महीने में शुरू के 15 दिन में बिजली की खपत 11.45 फीसदी बढ़कर 55.37 अरब यूनिट थी। अक्तूबर 2019 की इसी अवधि में देश की बिजली खपत 49.67 अरब यूनिट थी। विशेषज्ञों ने कहा कि अक्तूबर में बिजली खपत में दहाई अंक की वृद्धि दर्ज की गयी है। यह देश में वाणज्यि और उद्योग की मांग बढ़ने का संकेत है। आने वाले महीनों में यह स्थिति और बेहतर होगी। कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने 25 मार्च को लॉकडाउन कर दिया था। तब बिजली की खपत कम होने लगी थी और बिजली क्षेत्र को मार्च से अगस्त तक लगातार छह महीने तक मांग में कमी का सामना करना पड़ा।
आंकड़ों के मुताबिक छह महीने के अंतराल के बाद बिजली क्षेत्र की मांग में सितंबर में सुधार दिखना शुरू हुआ। सितंबर में बिजली खपत 4.6 फीसदी बढ़कर 112.43 अरब यूनिट पर पहुंच गयी जो पिछले साल इसी माह में 107.51 अरब यूनिट थी। अक्तूबर में व्यस्तम समय के दौरान अधिकतम बिजली आपूर्ति 170.04 गीगावाट रही। यह अक्तूबर 2019 के उच्चतम 164.25 गीगावाट की खपत से 3.52 फीसदी अधिक है।
एफपीआई ने लगाए 22 हजार करोड़ रुपये
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय बाजारों में अक्तूबर में 22,033 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदार की। इसकी मुख्य वजहें आर्थिक गतिविधियों का पुन: शुरू होना तथा कंपनियों का बढ़िया तिमाही परिणाम रहा। इससे पहले सितंबर में एफपीआई ने 3,419 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी। डिपॉजिटरी के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक अक्टूबर से 30 अक्तूबर के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इक्विटी में 19,541 करोड़ रुपये और ऋणपत्रों में 2,492 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। इस तरह कुल निवेश अक्टूबर में 22,033 करोड़ रुपये रहा।
मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर मैनेजर हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, 'वैश्विक बाजारों में अधिशेष तरलता की उपलब्धता भारतीय इक्विटी में विदेशी धन के प्रवाह को सुनिश्चित कर रही है।' उन्होंने कहा कि इसके अलावा, अर्थव्यवस्था के खुलने, व्यावसायिक गतिविधियों के फिर से शुरू होने और अपेक्षा से बेहतर तिमाही परिणामों ने निवेशकों की रुचि को बनाए रखने में मदद की।