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फिर टूटा विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड, पहुंचा 560.53 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर

Sat, 31 Oct 2020 10:36 AM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विदेशी मुद्रा भंडार - फोटो : अमर उजाला--रोहित झा
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देश के विदेशी मुद्रा भंडार ने एक बार फिर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यह 23 अक्तूबर को समाप्त सप्ताह में 5.41 अरब डॉलर बढ़कर 560.53 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के हिसाब से इससे पिछले 16 अक्तूबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 3.61 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 555.12 अरब डॉलर था। 

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इसलिए हुई वृद्धि
समीक्षावधि में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने की अहम वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) में बढ़ोत्तरी होना है। यह कुल विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा है। इस दौरान एफसीए 5.20 अरब डॉलर बढ़कर 571.52 अरब डॉलर हो गईं। विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी मुद्रा के अलावा यूरो, पौंड और येन जैसी अंतरराष्ट्रीय मुद्राएं भी शामिल होती हैं। लेकिन इनका मूल्य भी डॉलर में दर्शाया जाता है। 

17.5 करोड़ डॉलर बढ़ा स्वर्ण भंडार
रिजर्व बैंक का स्वर्ण भंडार समीक्षावधि में 17.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 36.86 अरब डॉलर हो गया है। इसके अलावा देश को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिला विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 80 लाख डॉलर बढ़कर 1.48 अरब डॉलर हो गया। वहीं आईएमएफ के पास जमा देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी 2.7 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.66 अरब डॉलर हो गया।

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क्या है विदेशी मुद्रा भंडार?
विदेशी मुद्रा भंडार देश के केंद्रीय बैंकों द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां होती हैं, जिनका उपयोग जरूरत पड़ने पर देनदारियों का भुगतान करने में किया जाता है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। यह आयात को समर्थन देने के लिए आर्थिक संकट की स्थिति में अर्थव्यवस्था को बहुत आवश्यक मदद उपलब्ध कराता है। इसमें आईएमएफ में विदेशी मुद्रा असेट्स, स्वर्ण भंडार और अन्य रिजर्व शामिल होते हैं, जिनमें से विदेशी मुद्रा असेट्स सोने के बाद सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार के चार बड़े फायदे
  • साल 1991 में देश को पैसा जुटाने के लिए सोना गिरवी रखना पड़ा था। तब सिर्फ 40 करोड़ डॉलर के लिए भारत को 47 टन सोना इंग्लैंड के पास गिरवी रखना पड़ा था। लेकिन मौजूदा स्तर पर, भारत के पास एक वर्ष से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त मुद्रा भंडार है। यानी इससे एक साल से अधिक के आयात खर्च की पूर्ति सरलता से की जा सकती है, जो इसका सबसे बड़ा फायदा है।
  • अच्छा विदेशी मुद्रा आरक्षित रखने वाला देश विदेशी व्यापार का अच्छा हिस्सा आकर्षित करता है और व्यापारिक साझेदारों का विश्वास अर्जित करता है। इससे वैश्विक निवेशक देश में और अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं।
  • सरकार जरूरी सैन्य सामान की तत्काल खरीदी का निर्णय बी ले सकती है क्योंकि भुगतान के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध है।
  • इसके अतिरिक्त विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को कम करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
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