आरबीआई की जुलाई बुलेटिन में 'अर्थव्यवस्था की स्थिति' पर एक लेख में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनावों और टैरिफ नीति अनिश्चितताओं के बीच जून और जुलाई में अब तक वैश्विक वृहद आर्थिक वातावरण अस्थिर बना हुआ है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
भारतीय रिजर्व बैंक के बुलेटिन में बुधवार को कहा गया कि भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ नीति अनिश्चितताओं के बीच जून-जुलाई के दौरान भारत की आर्थिक गतिविधियां ठप रहीं। जुलाई बुलेटिन में 'अर्थव्यवस्था की स्थिति' पर एक लेख में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनावों और टैरिफ नीति अनिश्चितताओं के बीच जून और जुलाई में अब तक वैश्विक वृहद आर्थिक वातावरण अस्थिर बना हुआ है।
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रिपोर्ट में कहा गया है, "खरीफ कृषि मौसम की संभावनाओं में सुधार, सेवा क्षेत्र में मजबूत गति जारी रहने तथा औद्योगिक गतिविधि में मामूली वृद्धि के साथ घरेलू आर्थिक गतिविधि में तेजी बनी हुई है।"
इसमें कहा गया है कि खाद्य कीमतों में गिरावट के कारण जून में लगातार पांचवें महीने खुदरा मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से नीचे रही। इसके अलावा, नीतिगत दरों में कटौती का लाभ ऋण बाजारों तक तेजी से पहुंचाने के लिए प्रणालीगत तरलता अधिशेष में बनी रही। इसमें कहा गया है कि पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और मध्यम बाह्य ऋण-जीडीपी अनुपात के कारण बाह्य क्षेत्र लचीला बना हुआ है।