भारतीय कंपनियों का विदेशी बाजारों से लिया हुआ कर्ज अब पहले की तुलना में और कम हो गया है। भारतीय कंपनियों का विदेशी बाजारों से कर्ज अक्तूबर में इससे पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 41 फीसदी घटकर 2.03 अरब डॉलर रह गया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। घरेलू कंपनियों ने अक्तूबर 2019 में विदेशी बाजारों से 3.41 अरब डॉलर का कर्ज जुटाया था।
रुपया मूल्य वाले बॉन्ड से नहीं जुटाई गई राशि
समीक्षाधीन महीने में इस साल और 2019 में रुपया मूल्य वाले बॉन्ड (आरडीबी) या मसाला बॉन्ड से कोई राशि नहीं जुटाई गई। अक्तूबर 2020 में बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ईसीबी) मार्ग से जुटाई गई कुल राशि में से 1.73 अरब डॉलर स्वत: मंजूर मार्ग से और शेष 30 करोड़ डॉलर मंजूरी मार्ग से जुटाए गए।
किस कंपनी ने कितनी जुटाई राशि?
स्वत: मंजूर मार्ग से रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पुराने ईसीबी को चुकाने के लिए एक अरब डॉलर जुटाए। वहीं बजाज फाइनेंस तथा लार्सन एंड टुब्रो ने 10-10 करोड़ डॉलर जुटाए। एटीसी टायर्स एपी प्राइवेट लिमिटेड ने नई परियोजना के लिए 5.2 करोड़ डॉलर और लक्सशेयर इंडिया ने 5.1 करोड़ डॉलर जुटाए। मंजूरी मार्ग से धन जुटाने वाली पावर फाइनेंस कॉरपोरशन एकमात्र कंपनी रही। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन ने दो किस्तों में 30 करोड़ डॉलर जुटाए।
FDI इक्विटी प्रवाह ने पार किया 500 अरब डॉलर का आंकड़ा
मालूम हो कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफपीआई) इक्विटी प्रवाह अप्रैल 2000 से सितंबर 2020 के दौरान 500 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। इससे पता चलता है कि दुनिया में भारत की गिनती एक सुरक्षित और महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य के रूप में होने लगी है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में देश में 500.12 अरब डॉलर का एफडीआई आया है।