भारत में करोड़पतियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की एक हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2024 से 2029 के बीच करोड़पतियों की संख्या में 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना है। यह दर वैश्विक औसत 21 प्रतिशत से कहीं अधिक है। ऐसे लोग जिनके पास एक मिलियन डॉलर यानी लगभग 8.3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की निवेश योग्य संपत्ति है, उन्हें इस श्रेणी में रखा जता है।
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एशिया प्रशांत यूरोपीय देशों से आगे
बीसीजी के प्रबंध निदेशक मयंक झा ने कहा कि 2014 से 2024 तक क्षेत्रवार जैविक वृद्धि में भारी अंतर रहा। एशिया प्रशांत क्षेत्र में संपत्ति प्रबंधकों ने 50 प्रतिशत की दर हासिल की है। यह यूरोप, पश्चिम एशिया और अफ्रीका (ईएमईए) और उत्तरी अमेरिका की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। इसे निर्णायक रूप से भारत जैसे उभरते बाजारों से बढ़ावा मिला है। झा ने कहा कि पहली बार संपत्ति बनाने वालों, खासतौर पर मिलेनियल उद्यमियों और कॉर्पोरेट नेताओं की पीढ़िगत लहर उद्योग को नया आकार दे रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जनरेटिव एआई संपत्ति प्रबंधन के हर पहलू ग्राहक पहचान, सेवा, और सलाह में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
वित्तीय परिसंपत्तियों में हुई 8.1 प्रतिशत की वृद्धि
वैश्विक वित्तयी संपत्ति 2024 में रिकॉर्ड 305 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ गया। यह मजबूत इक्विटी बाजार प्रदर्शन के बीच वित्तीय परिसंपत्तियों में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि से प्रेरित है। बीसीजी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की वित्तीय संपत्ति में 10.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के औसत 7.3 प्रतिशत से अधिक है। एशिया- प्रशांत में 2029 तक 9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि होने का अनुमान है। यह उत्तरी अमेरिका के 4 प्रतिशत और पश्चिमी यूरोप के 5 प्रतिशत से काफी अधिक है।
भारत में यह तीव्र विस्तार वित्तीय परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। साथ ही इस उभरती मांग को पूरा करने के लिए तैयार सलाहकारों और संस्थानों के लिए अभूतपूर्व अवसर का संकेत देता है।