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विंडफॉल टैक्स में कटौती: सरकार ने डीजल और एटीएफ निर्यात पर कर की दरें घटाईं, पेट्रोल पर क्या फैसला हुआ?

Thu, 01 Oct 2026 03:22 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।

सार

सरकार ने एक अक्तूबर से डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। डीजल पर 4 रुपये और एटीएफ पर 4.5 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है, जबकि पेट्रोल पर शुल्क अपरिवर्तित है। यह कदम पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घरेलू ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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विंडफॉल टैक्स में कटौती - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने 1 अक्तूबर से डीजल और एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। हालांकि, पेट्रोल के निर्यात पर यह शुल्क मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रखा गया है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी। यह निर्णय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच घरेलू ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

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डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) और सड़क व अवसंरचना उपकर अब 20 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह, एटीएफ के निर्यात पर एसएईडी की दर 15 रुपये प्रति लीटर से कम करके 10.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है। पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क अगले पखवाड़े के लिए 0.5 रुपये प्रति लीटर पर ही बना रहेगा। ये नई दरें 1 अक्तूबर से प्रभावी होंगी। सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह शुल्क लगाया था। बाद में 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी यह शुल्क लागू किया गया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल की मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

विंडफॉल टैक्स क्यों लगाया गया?

यह विंडफॉल टैक्स पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण लगाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश में ईंधन की घरेलू उपलब्धता को बढ़ाना था। सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती थी कि निर्यातक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का अनुचित लाभ न उठा सकें। युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। इस कर का लक्ष्य निर्यात को हतोत्साहित करके पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना था।

शुल्क दरों में क्या बदलाव हुए?

डीजल के निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क अब 4 रुपये प्रति लीटर कम हो गया है। यह 20 रुपये से घटकर 16 रुपये प्रति लीटर हो गया है। एटीएफ के निर्यात पर भी 4.5 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इसकी दर 15 रुपये से घटकर 10.5 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह 0.5 रुपये प्रति लीटर पर ही बना हुआ है।

निर्णय कब से प्रभावी, घरेलू बाजार में कितना असर?

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, शुल्क दरों में यह बदलाव 1 अक्तूबर से प्रभावी होगा। सरकार हर पखवाड़े इन दरों की समीक्षा और संशोधन करती है। डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क पहली बार 27 मार्च को लगाया गया था। पेट्रोल पर यह शुल्क 16 मई से लागू किया गया था। घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इस बदलाव का कोई असर नहीं होगा।

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