Global Oil Demand: आने वाले दस वर्षों में वैश्विक तेल की मांग में भारत का सबसे बड़ा हिस्सा हो सकता है। दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देशों सूची में चीन दूसरे तो भारत तीसरे स्थान पर है। दोनों दुनिया के सबसे बड़ी आबादी वाले देश भी हैं। वहीं, भारत में प्राकृतिक गैस की मांग भी चीन के मुकाबले थोड़ा ज्यादा तेजी से बढ़ेगी।
चीन ने पिछले दशक में वैश्विक तेल की मांग को बढ़ावा दिया, लेकिन अब भारत आने वाले दस वर्षों में तेल की मांग में वृद्धि के मामले में चीन को पीछे छोड़ने के लिए तैयार है। भारत और चीन दुनिया के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देश हैं, लेकिन दोनों देशों में मांग वृद्धि में अंतर है। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
विज्ञापन
मूडीज के मुताबिक, अगले दशक में भारत में मांग वृद्धि और आयात निर्भरता अधिक होगी। भारत में मांग चीन की तुलना अधिक तेजी से बढ़ेगी, क्योंकि चीन का आर्थिक विकास धीमा हो रहा है। भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियां बीते कुछ वर्षों से अपनी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने में काफी निवेश कर रही हैं। इनमें भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) शामिल हैं।
चीन के मुकाबले भारत में गैस की मांग अधिक
गैस की मांग पर मूडीज ने कहा है कि भारत में प्राकृतिक गैस की मांग चीन के मुकाबले थोड़ा ज्यादा तेजी से बढ़ेगी। भारत का लक्ष्य 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 15% तक करने का लक्ष्य है। फर्टिलाइजर और पेट्रोकेमिकल जैसे उद्योगों में गैस का इस्तेमाल होता है। साथ ही, शहरों और कस्बों में घरेलू और ट्रांसपोर्ट के लिए भी गैस की खपत बढ़ रही है। इन सब कारणों से भारत में प्राकृतिक गैस की मांग हर साल 4 से 7% तक बढ़ सकती है।
विज्ञापन
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करने की जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) का उपयोग शहरों में वाहनों और घरों में तेजी से बढ़ा है। लेकिन आगे इसमें विस्तार की कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे कि पूरे देश में गैस की पाइपलाइन कनेक्टिविटी का अभाव और कीमतों की समस्या। क्योंकि गैस की तुलना में नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) जैसे विकल्प कई बार सस्ते होते हैं। भले ही भारत में गैस की मांग बढ़ रही है, लेकिन इसकी पूरी संभावनाओं को पाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और किफायती दामों पर फोकस करना जरूरी है।