नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने शुक्रवार को भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर नवंबर के अंत तक कोई सकारात्मक घोषणा हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से बातचीत में चुनौतियां रही हैं, लेकिन अब दोनों देशों के बीच नए सिरे से कोशिशें जारी हैं।
सुब्रह्मण्यम के मुताबिक, “भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे चमकदार बिंदु है। हमारे पास आकार है, बाजार है और नवाचार की क्षमता है। यही हमारी ताकत है और यही कारण है कि दुनिया भारत की ओर आकर्षित होगी।”
उन्होंने कहा कि भारत अब किसी खेमे में शामिल होने की मजबूरी में नहीं है, बल्कि अन्य देश खुद भारत के साथ जुड़ने को विवश होंगे। इसलिए हमें अमेरिका और ब्रिक्स के बीच किसी पक्ष को चुनने की जरूरत नहीं है।
नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि दुनिया आर्थिक और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में है, ऐसे में भारत को अपनी आंतरिक क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। “अगर हमें युद्ध, अर्थव्यवस्था या टैरिफ जैसे अस्थिर दौर में रहना है, तो अपनी आंतरिक ताकतों को और मजबूत करना होगा,” उन्होंने कहा।
सुब्रह्मण्यम ने बताया कि केंद्र सरकार की सबसे बड़ी सुधार पहल राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन नवंबर के अंत तक पूरी तरह शुरू हो जाएगी। यह मिशन भारत के विनिर्माण क्षेत्र को नया रूप देगा। “यह सिर्फ पैसा फेंकने की नीति नहीं है, बल्कि वास्तविक क्षमताओं के निर्माण पर केंद्रित है। सरकार का लक्ष्य विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी को मौजूदा 15-17 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक करना है।
भारत-चीन संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर सुब्रह्मण्यम ने कहा कि चीन विश्व अर्थव्यवस्था का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है, इसलिए उससे पूरी तरह अलग होना संभव नहीं है। चाहे हमें पसंद हो या न हो, भारत के लिए चीन के साथ सीमित आर्थिक जुड़ाव बनाए रखना आवश्यक है।
सुब्रह्मण्यम ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वदेशी का मतलब संरक्षणवाद नहीं है। इसका मतलब है आत्मनिर्भरता यानी अप्रत्याशित परिस्थितियों से खुद को सुरक्षित रखना।