New Policy: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने देश में उच्च तकनीक विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार के व्यापक प्रयासों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, साथ ही सेमीकॉन मिशन के लिए 74,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। खिलौना और जूता उद्योग के लिए नई नीतियां लाने पर मंत्री क्या बोले, आइए जानें।
सरकार जल्द ही भारत में खिलौनों और जूतों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां पेश करेगी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह बात कही है। गोयल ने कहा इस कदम का उद्देश्य देश को इन क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाना है। बुधवार को बेंगलुरु में इन्वेस्ट कर्नाटक 2025- ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में बोलते हुए, गोयल ने खिलौना उद्योग में सरकार के प्रयासों पर भी बात कही।
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उन्होंने कहा, "हमारे खिलौनों का आयात घटकर 50 प्रतिशत रह गया है। हमारा निर्यात अब 5 साल पहले की तुलना में 3.5 गुना है, और हम जल्द ही खिलौनों, जूतों में विनिर्माण को और बढ़ावा देने के लिए नीतियां लेकर आएंगे, ताकि हम इन क्षेत्रों में वैश्विक चैंपियन बन सकें।" उन्होंने कहा कि आगामी नीतियां भारत में खिलौनों और जूतों के विनिर्माण के विकास को और बढ़ावा देंगी।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने देश में उच्च तकनीक विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार के व्यापक प्रयासों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, साथ ही सेमीकॉन मिशन के लिए 74,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटो कंपोनेंट, सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे उद्योगों को मजबूत करना है, जो महत्वपूर्ण रोजगार अवसर पैदा करते हैं।
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गोयल ने भारत की आर्थिक वृद्धि में कर्नाटक की महत्वपूर्ण भूमिका और विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "हमारा ध्यान वैश्विक क्षमता केंद्रों पर है, जिन्हें पूरे देश में स्थापित किया जा रहा है और कर्नाटक, विशेष रूप से बेंगलुरु में बड़ी संख्या में वैश्विक क्षमता केंद्र हैं और आने वाले वर्षों में और भी कई केंद्र बनेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को दोहराया, जो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने पर केंद्रित है।