Global Recession: वैश्विक मंदी की आशंका भारत के निर्यात कारोबार की उम्मीदों को कम कर सकते हैं। हालांकि, लचीली घरेलू मांग, एक मजबूत वित्तीय प्रणाली और संरचनात्मक सुधारों के साथ एक सक्रिय निवेश चक्र आर्थिक विकास को आगे बढ़ने के लिए गति प्रदान करेगा।
वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में गुरुवार को कहा गया कि वैश्विक मौद्रिक सख्ती के बावजूद भारत आने वाले वर्षों में वृहद आर्थिक स्थिरता के दम पर मध्यम तेज गति से विकास करने में सक्षम है। इसमें आगे कहा गया है कि आने वाले महीनों में खरीफ फसलों की आवक के साथ मुद्रास्फीति का दबाव कम होगा और साथ ही व्यापार की संभावनाओं में सुधार के साथ नौकरी के अवसर भी बढ़ेंगे।
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अक्टूबर 2022 के लिए मासिक आर्थिक समीक्षा में यह भी आगाह किया गया है कि अमेरिकी मौद्रिक सख्ती भविष्य के लिए एक जोखिम की तरह है। इससे स्टॉक की कीमतों में गिरावट, मुद्राओं में कमजोरी और उच्च बॉन्ड प्रतिफल जैसी चीजें हो सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर की कई सरकारों के लिए उधार लेने की लागत बढ़ सकती है। इसमें कहा गया है कि वैश्विक विकास की संभावनाओं में तेजी से गिरावट, उच्च मुद्रास्फीति और बिगड़ती वित्तीय स्थिति ने आसन्न वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ा दी है।
वैश्विक मंदी की आशंका भारत के निर्यात कारोबार की उम्मीदों को कम कर सकते हैं। हालांकि, लचीली घरेलू मांग, एक मजबूत वित्तीय प्रणाली और संरचनात्मक सुधारों के साथ एक सक्रिय निवेश चक्र आर्थिक विकास को आगे बढ़ने के लिए गति प्रदान करेगा।