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विकसित भारत बनने की रणनीति: अनंत नागेश्वरन बोले- हर साल 80 लाख नौकरियों की जरूरत; विनिर्माण पर भी जोर

Mon, 21 Apr 2025 09:49 AM IST
शुभम कुमार बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत को  2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कम से कम अगले 10 से 12 सालों तक हर साल 80 लाख नई नौकरियां पैदा करनी होंगी। साथ ही उन्होंने जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। 
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मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन। - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने भारत को 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य की तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कम से कम अगले 10 से 12 सालों तक हर साल 80 लाख नई नौकरियां पैदा करनी होंगी। इसके साथ ही देश की जीडीपी में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र की हिस्सेदारी भी बढ़ानी होगी। बता दें कि नागेश्वरन कोलंबिया विश्वविद्यालय में आयोजित 'कोलंबिया इंडिया समिट 2025' में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम भारत की आर्थिक नीतियों और भविष्य को लेकर आयोजित किया गया था।

आने वाले साल भारत के लिए कठिन

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नागेश्वरन ने समिट में कहा कि आने वाले 10-20 साल भारत के लिए आसान नहीं होंगे। जैसा अनुकूल माहौल भारत को 1990 के बाद मिला था, वैसा अब नहीं मिलेगा। दुनिया की बदलती परिस्थितियां, तकनीकी बदलाव और वैश्विक संघर्ष आर्थिक विकास में बाधा बन सकते हैं। 

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उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और टेक्नोलॉजी जैसी चुनौतियां अब सामने हैं, जो पहले विकसित देशों को नहीं झेलनी पड़ीं। उन्होंने कहा कि एआई जैसी तकनीकें एंट्री-लेवल नौकरियों को खत्म कर सकती हैं। ऐसे में हमें नीतियों में इस तरह का संतुलन लाना होगा, जिससे रोजगार भी बने और तकनीक का इस्तेमाल भी हो।

विनिर्माण और एमएसएमई पर जोर
नागेश्वरन ने कहा कि अगर भारत को वैश्विक विनिर्माण में मजबूत बनना है, तो लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) का विकास भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश बिना मजबूत एमएसएमई सेक्टर के मैन्युफैक्चरिंग महाशक्ति नहीं बन पाया। साथ ही उन्होंने कहा कि या तो हमें निवेश दर को बढ़ाना होगा या फिर मौजूदा निवेश से अधिकतम लाभ निकालना होगा, क्योंकि वैश्विक पूंजी प्रवाह (Foreign Investment) पर भी अब संघर्षों का असर पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि पहले भारत की जीडीपी में निर्यात का योगदान 40% तक था (2003-08), जो अब घटकर 20% से भी कम हो गया है, और आगे और गिर सकता है। इसलिए, सिर्फ निर्यात पर निर्भर रहकर विकास करना अब संभव नहीं होगा।

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6.5% की सतत विकास दर ही असली रास्ता

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नागेश्वरन ने कहा कि कोविड के बाद भारत ने पिछले तीन सालों में औसतन 8% की विकास दर हासिल की है। हालांकि उन्होंने माना कि इस दर को बनाए रखना मुश्किल होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर भारत अगले 10-20 वर्षों तक 6.5% की सतत विकास दर बनाए रखे और कभी-कभी उसे 7% तक बढ़ा सके, तो यह एक व्यवहारिक रास्ता हो सकता है।

गौरतलब है कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संगठन (यूएनसीटीएडी) ने भी कहा था कि 2025 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.5% रह सकती है, जबकि बाकी दुनिया में मंदी का खतरा बना हुआ है। इसको लेकर नागेश्वरन ने कहा कि भारत के सामने चुनौतियां ज़रूर हैं, लेकिन अगर नीतियां सही दिशा में बनाई गईं और घरेलू सुधारों पर ध्यान दिया गया, तो भारत एक मजबूत और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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