भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने भारत को 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य की तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कम से कम अगले 10 से 12 सालों तक हर साल 80 लाख नई नौकरियां पैदा करनी होंगी। इसके साथ ही देश की जीडीपी में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र की हिस्सेदारी भी बढ़ानी होगी। बता दें कि नागेश्वरन कोलंबिया विश्वविद्यालय में आयोजित 'कोलंबिया इंडिया समिट 2025' में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम भारत की आर्थिक नीतियों और भविष्य को लेकर आयोजित किया गया था।
आने वाले साल भारत के लिए कठिन
विनिर्माण और एमएसएमई पर जोर
नागेश्वरन ने कहा कि अगर भारत को वैश्विक विनिर्माण में मजबूत बनना है, तो लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) का विकास भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश बिना मजबूत एमएसएमई सेक्टर के मैन्युफैक्चरिंग महाशक्ति नहीं बन पाया। साथ ही उन्होंने कहा कि या तो हमें निवेश दर को बढ़ाना होगा या फिर मौजूदा निवेश से अधिकतम लाभ निकालना होगा, क्योंकि वैश्विक पूंजी प्रवाह (Foreign Investment) पर भी अब संघर्षों का असर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले भारत की जीडीपी में निर्यात का योगदान 40% तक था (2003-08), जो अब घटकर 20% से भी कम हो गया है, और आगे और गिर सकता है। इसलिए, सिर्फ निर्यात पर निर्भर रहकर विकास करना अब संभव नहीं होगा।
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6.5% की सतत विकास दर ही असली रास्ता
गौरतलब है कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संगठन (यूएनसीटीएडी) ने भी कहा था कि 2025 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.5% रह सकती है, जबकि बाकी दुनिया में मंदी का खतरा बना हुआ है। इसको लेकर नागेश्वरन ने कहा कि भारत के सामने चुनौतियां ज़रूर हैं, लेकिन अगर नीतियां सही दिशा में बनाई गईं और घरेलू सुधारों पर ध्यान दिया गया, तो भारत एक मजबूत और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है।