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Moody's: 'भारत 2024 में 7.2% की वृद्धि दर हासिल करेगा', मूडीज का दावा- RBI इस साल ब्याज दरें स्थिर रखेगा

Fri, 15 Nov 2024 07:40 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Moody's: आरबीआई की ब्याज दर निर्धारण मौद्रिक नीति समिति की बैठक अगले महीने होने वाली है, लेकिन महंगाई के उच्च स्तर पर होने के कारण  यह संभावना नहीं है कि आरबीआई बेंचमार्क ब्याज दरों में कटौती करेगा। अमेरिकी रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपने ग्लोबल मैक्रो आउटलुक 2025-26 में कहा है कि घरेलू खपत बढ़ने की संभावना है, जिसे चालू त्योहारी सीजन के दौरान खर्च में वृद्धि और ग्रामीण मांग में निरंतर तेजी से बढ़ावा मिलेगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है, लेकिन मुद्रास्फीति की जोखिम के कारण आरबीआई इस साल अपेक्षाकृत सख्त मौद्रिक नीति बरकरार रख सकता है। मूडीज रेटिंग्स ने शुक्रवार को 2024 में भारत के लिए 7.2 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान जताते हुए यह बात कही।

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मूडीज ने कहा कि निकट भविष्य में तेजी के बावजूद, खुदरा मुद्रास्फीति आने वाले महीनों में रिजर्व बैंक के लक्ष्य के अनुरूप कम हो जाएगी, क्योंकि अधिक बुवाई और पर्याप्त खाद्यान्न बफर स्टॉक के कारण खाद्य कीमतों में कमी आएगी। सब्जियों की कीमतों में तेज उछाल के कारण खुदरा मुद्रास्फीति 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.21 पर पहुंच गई, जो आरबीआई की ऊपरी सहनीय सीमा को पार कर गई। एजेंसी ने कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में छिटपुट दबाव के कारण अवस्फीति की दिशा में अस्थिरता बनी हुई है।

मूडीज ने कहा, "भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और मौसम की चरम स्थितियों से मुद्रास्फीति के लिए संभावित जोखिम आरबीआई की नीतिगत ढील के प्रति सतर्क रुख को रेखांकित करते हैं। हालांकि केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर में रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखते हुए अपनी मौद्रिक नीति के रुख को तटस्थ कर दिया, लेकिन स्वस्थ विकास गतिशीलता और मुद्रास्फीति के जोखिमों को देखते हुए अगले साल भी वह अपेक्षाकृत सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखेगा।"
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आरबीआई की ब्याज दर निर्धारण मौद्रिक नीति समिति की बैठक अगले महीने होने वाली है, लेकिन महंगाई के उच्च स्तर पर होने के कारण  यह संभावना नहीं है कि आरबीआई बेंचमार्क ब्याज दरों में कटौती करेगा। अमेरिकी  रेटिंग एजेंसी ने अपने ग्लोबल मैक्रो आउटलुक 2025-26 में कहा कि घरेलू खपत बढ़ने की संभावना है, जिसे चालू त्योहारी सीजन के दौरान खर्च में वृद्धि और ग्रामीण मांग में निरंतर तेजी से बढ़ावा मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, बढ़ती क्षमता उपयोगिता, उत्साहजनक कारोबारी भावना तथा सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर व्यय पर निरंतर जोर दिए जाने से निजी निवेश को समर्थन मिलेगा। 2024 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी में साल-दर-साल आधार पर 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो घरेलू खपत में सुधार, मजबूत निवेश और मजबूत विनिर्माण गतिविधि के कारण संभव हुआ। जुलाई-सितंबर तिमाही में भी स्थिर आर्थिक गति के संकेत हैं।

मूडीज ने कहा, "... व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से, भारतीय अर्थव्यवस्था ठोस विकास और नरम मुद्रास्फीति के मिश्रण के साथ एक अच्छी स्थिति में है। हम कैलेंडर वर्ष 2024 के लिए 7.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाते हैं, इसके बाद 2025 में 6.6 प्रतिशत और 2026 में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी।"

इसमें कहा गया है कि मजबूत आर्थिक बुनियादी तथ्य, जिनमें स्वस्थ कॉर्पोरेट और बैंक बैलेंस शीट, मजबूत बाह्य स्थिति और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार शामिल हैं, भी विकास के दृष्टिकोण के लिए अच्छे संकेत हैं। मूडीज ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने महामारी के दौरान आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ऊर्जा और खाद्य संकट, उच्च मुद्रास्फीति और इसके परिणामस्वरूप मौद्रिक नीति में कसावट के बावजूद वापसी में उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है।

मूडीज रेटिंग्स की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और रिपोर्ट की लेखिका माधवी बोकिल ने कहा, "अधिकांश जी-20 अर्थव्यवस्थाएं स्थिर वृद्धि का अनुभव करेंगी और नीतिगत सहजता तथा सहायक वस्तु कीमतों से लाभान्वित होती रहेंगी। हालांकि, अमेरिकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नीतियों में चुनाव के बाद होने वाले बदलावों से वैश्विक आर्थिक विखंडन में तेजी आ सकती है, जिससे चल रहे स्थिरीकरण को और जटिल बना सकती है।"

मूडीज ने कहा कि व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से अमेरिका और चीन के बीच, वैश्विक वृहद आर्थिक दृष्टिकोण के लिए प्राथमिक जोखिम हैं। संभावित दीर्घकालिक भू-आर्थिक विखंडन वैश्विक व्यापार और वित्तीय जुड़ाव को जटिल बना सकता है। मूडीज ने कहा कि विकास के मजबूत घरेलू चालकों वाली अर्थव्यवस्थाएं अधिक लचीलापन और स्थिरता का अनुभव करेंगी।

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