भारत को सबसे अधिक संभावना वाली एक प्रमुख अर्थव्यवस्था बताते हुए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री ए माइकल स्पेन्स ने कहा है कि देश ने दुनिया में अब तक की सबसे अच्छी डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय ढांचे सफलतापूर्वक विकसित किया है। वर्ष 2001 में आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित स्पेंस ने सोमवार को ग्रेटर नोएडा के बेनेट विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत के दौरान अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, ''अभी सर्वाधिक संभावित वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्था भारत है। भारत ने दुनिया में अब तक की सबसे अच्छी डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्त वास्तुकला को सफलतापूर्वक विकसित किया है। यह खुला, प्रतिस्पर्धी है और एक विशाल क्षेत्र में समावेशी प्रकार की सेवाएं प्रदान करता है।"
गो फर्स्ट की समाधान प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा 60 दिन बढ़ी
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने बंद पड़ी विमानन कंपनी गो फर्स्ट की समाधान प्रक्रिया पूरी करने के लिए समयसीमा 60 दिन के लिए बढ़ा दी है। दिल्ली स्थित एनसीएलटी की दो सदस्यीय पीठ ने गो फर्स्ट के समाधान पेशेवर (आरपी) द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) को पूरा करने के लिए समयसीमा बढ़ाने की मांग की गई थी। आरपी की ओर से पेश दिवाकर माहेश्वरी ने दलील दी कि अब तक तीन पार्टियों ने गो फर्स्ट के लिए अपनी रुचि की अभिव्यक्ति सौंपी है और बयाना राशि जमा की है। इन फर्मों से गो फर्स्ट के लिए समाधान योजना प्रस्तुत करने की उम्मीद की जाती है जो 10 मई, 2023 से CIRP के दौर से गुजर रहा है। एनसीएलटी द्वारा दिया गया यह दूसरा ऐसा विस्तार है।
विकसित देश बनने के लिए भारत को हर साल 8 फीसदी तक वृद्धि दर की जरूरत ः रंगराजन
आरबीआई के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन ने कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए भारत को हर साल सात से आठ फीसदी की वृदि्ध दर की जरूरत है। नवाचार गरीबी या असमानताओं को कम करने का एकमात्र समाधान नहीं हो सकता है।
पूर्व गवर्नर ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा, विकसित देश का मतलब प्रति व्यक्ति आय 13,000 डॉलर होनी चाहिए। अभी भारत में प्रति व्यक्ति आय 2,700 डॉलर है। इसका मतलब इसे पांच गुना बढ़ाने की जरूरत है। तेज विकास दर के अलावा देश को नकदी व बुनियादी आय के रूप में सब्सिडी जैसी सामाजिक सुरक्षा की जरूरत हो सकती है। इसे हासिल करने के लिए 7-8 फीसदी की दर से विकास करना होगा।
रंगराजन ने कहा, विनिमय दर को निचले स्तर पर रखा जाए तो नॉमिनल आय में वृद्धि होगी। तभी भारत विकसित राष्ट्र बन सकता है। हाशिये पर पड़े लोगों के लिए आजीविका के मौके बढ़ाने पर भी जोर देना होगा। नवाचार आधारित तकनीक ऐसी हो, जो गरीबों को सस्ती और सुलभ सुविधाएं प्रदान करें।
चावल की कुछ किस्मों के लिए कोड विकसित करेगी सरकार, बढ़ेगा निर्यात
सरकार चावल की कुछ किस्मों के लिए नए एचएसएन कोड (हारमोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नोमेनक्लेचर) विकसित करने पर विचार कर रही है। इसका मकसद चावल की उन किस्मों का निर्यात करना है, जिनका पारंपरिक रूप से देश में लोग उपभोग नहीं करते हैं। वर्तमान में गैर-बासमती सफेद चावल की सभी किस्मों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है।
वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, गैर-बासमती चावल की 40-50 किस्में हैं। सरकार जब निर्यात पर रोक लगाती है, तो सोना मसूरी, गोविंद भोग, काला नमक या सामान्य सफेद गैर-बासमती चावल जैसी सभी किस्मों का निर्यात बंद हो जाता है। चावल की कुछ अन्य किस्मों के लिए नया एचएसएन कोड उद्योग की मांग है। इसमें अंतर कैसे करें, यह बहस का मुद्दा है। वैशि्वक व्यापार की भाषा में हर उत्पाद को एचएसएन कोड के तहत वर्गीकृत किया जाता है। यह दुनिया में वस्तुओं के व्यवस्थित वर्गीकरण में मदद करता है। एजेंसी