भारत 2020 तक 100 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त कर लेगा। इसके साथ ही वह इसके दो साल बाद यानी 2022 तक 175 गीगावाट क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ेगा। इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार अगर महत्वपूर्ण मुद्दों पर नजर रखने के साथ समय पर उनका हल निकाल पाती है तो भारत इन लक्ष्यों को आसानी से पा सकता है।
इस साल नवंबर अंत तक देश की नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 86 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई। इसमें सौर, पवन, छोटी पनबिजली, बायोमास और कचरे से बिजली जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, करीब 30 गीगावाट की नवीकरणीय उर्जा क्षमता क्रियान्वयन के चरण में है। इसमें 18 गीगावाट सौर ऊर्जा और 10 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। 40 गीगावाट क्षमता के लिए निविदा निकाली जा रही है। इसमें 36 गीगावाट सौर ऊर्जा और 3.4 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है।
बिजली मंत्री आरके सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं की वजह से 2020 और उसके आगे के वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को काफी प्रोत्साहन मिलेगा। मुझे उम्मीद है कि 2020 तक देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 100 गीगावाट के स्तर को पार कर जाएगी। सरकार ने इसी साल कई नई योजनाएं शुरू की है। इनमें पीएम-कुसुम, सौर रूफटॉप चरण-2, अल्ट्रा मेगा नवीकरणीय ऊर्जा बिजली पार्कों का विकास (यूएमआरईपीपी) आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में हमारी पहल का मकसद नीति के मोर्चे पर अनुकूल माहौल बनाकर नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करना है। सरकार का लक्ष्य निवेशकों, विनिर्माताओं और अन्य अंशधारकों के लिए जोखिम घटाने के साथ कारोबार सुगमता की स्थिति को बेहतर करना है।
आरके सिंह ने कहा कि सरकार को प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे सुधार को देखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण पर भी ध्यान देना होगा। सामान्य शब्दों में कहें तो 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भंडारण प्रणाली विकसित करनी होगी। हम लिथियम आयन बैटरी, पंप हाइड्रो और हाइड्रोजन जैसी भंडारण प्रणालियों की वृद्धि और विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत चाहता है कि सरकार 100 गीगावाट से अधिक क्षमता की भंडारण नीति लाए ताकि इस क्षेत्र में निवेश करने के लिए निजी खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा सके। हालांकि, सोलर पावर डेवलपर्स एसोसिएशन का कहना है कि नीतियों को लेकर केंद्र और राज्यों के रवैये के कारण 2019 इस क्षेत्र के लिए अच्छा साल नहीं रहा।