मूडीज रेटिंग्स की बुधवार को जारी रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापार व्यवधानों के नकारात्मक प्रभावों से निपटने के मामले में अच्छी स्थिति में है। भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था और निर्यात पर कम निर्भरता स्थिति को मजबूत बनाती है। यदि व्यापार वार्ता करने से अन्य बाजारों की तुलना में भारत पर टैरिफ कम हो जाता है, तो अमेरिकी बाजारों में भारत-निर्मित वस्तुओं की मांग बढ़ सकती है और इससे भारत को लाभ होगा।
आर्थिक वृद्धि 6.7% से घटकर 6.3% हो सकती है
रेटिंग्स एजेंसी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ और अमेरिका की ज्यादातर चीनी सामानों पर लगाई गई 30% टैरिफ वैश्विक विकास में बाधा डालेंगी। इससे वर्ष 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.7% से घटकर 6.3% हो सकती है। फिर भी, यह वृद्धि दर जी-20 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक होगी। सरकार की निजी खपत बढ़ाने, उद्योगों की क्षमता बढ़ाने और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की योजनाएं वैश्विक मांग में कमी के प्रभाव को कम करेंगी।
भारत के बुनियादी ढांचे पूंजी निवेश को आकर्षित करेंगे
मूडीज के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव अधिकांश बुनियादी ढांचा पर कम प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि यह क्षेत्र घरेलू मांग पर निर्भर है और सरकारी समर्थन से लाभान्वित होता है। उन्होंने आगे कहा कि बिजली,परिवहन और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों की मजबूत मांग अगले पांच-सात सालों में पूंजी निवेश को आकर्षित करना जारी रखेगी।
भारत की बैंकिंग व्यवस्था स्थिर और मजबूत है-मूडीज
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत का मजबूत बैंकिंग बाजार और स्थिर ऋण स्थितियां इसकी आर्थिक मजबूती को रेखांकित करती हैं। फिर भी,वैश्विक आर्थिक और ऋण स्थितियों में गिरावट का असर पड़ेगा। महंगाई में कमी से ब्याज दरों में कटौती की संभावना बनती है,जिससे अर्थव्यवस्था को और अधिक समर्थन मिलेगा। साथ ही बैंकिंग क्षेत्र की आसान प्रक्रिया होने से ऋण देने में सुविधा होगी।
मूडीज ने दी चेतावनी
मूडीज ने चेतावनी दी है कि विनिमय दर में उतार-चढ़ाव मौद्रिक नीति में ढील की गति को प्रभावित कर सकता है। दरों में बहुत तेजी से कमी करने से पूंजी में गिरावट बढ़ सकती है और रुपये का मूल्य तेजी से गिर सकता है, जो पिछले साल के आखिर में डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ था। हालांकि अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं के साथ-साथ रुपया कुछ हद तक मजबूत हुआ है।
बैंकों को गैर-ब्याज आय में लाभ मिलेगा
बैंकों के लिए गैर-ब्याज आय में इजाफा होगा। इसमें बड़े कारोबारी वॉल्यूम, वेल्थ और बीमा सेवाओं और अवसरवादी बॉन्ड के कारण लाभ मिलेगा। मूडीज ने कहा,"कुल मिलाकर, हमें उम्मीद है कि संपत्तियों पर सिस्टमवाइड रिटर्न वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में 1.40% से घटकर वित्त वर्ष 26 में 1.25% की सीमा तक आ जाएगा।" साथ ही, पाकिस्तान-भारत तनाव के कारण भारत की तुलना में पाकिस्तान के विकास पर ज्यादा दबाव पड़ेगा।