सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोना खरीदने से बचने की सलाह का असर घरेलू मांग पर पड़ा है। इसके अलावा, दुनियाभर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की चिंता ने भी सोने की मांग को कमजोर किया है। इसी को देखते हुए कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने वित्त वर्ष 2027 में भारत के सोने के आयात के अनुमान में 88 अरब डॉलर की कमी आने की संभावना जताई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मई में सोने के मासिक आयात में गिरावट भी दर्ज की गई। हालांकि, कोटक का मानना है कि आने वाले त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से सोने के आयात में कुछ सुधार हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 के अंत में 88 अरब अमेरिकी डॉलर के सोने के आयात का अनुमान फर्म ने लगाया है। हालांकि आगामी त्योहारी सीजन में मांग में तेजी क संभावना है। क्योंकि आगामी त्योहारी सीजन में मांग में तेजी आने की संभावना के साथ वित्त वर्ष 2027 से पहले महीने के रुझानों के आधार पर गिरावट का जोखिम दिखाई दे रहा है।
वित्त वर्ष 2027 के पहले पांच महीनों में कैसे रहे आंकड़े?
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 के पहले पांच महीनों में सोने का आयात 17.5 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधिक में 16.9 अरब अमेरिकी डॉलर का था। रिपोर्ट कहती है, वित्त वर्ष 2026 में कुल आयात 72 अरब अमेरिकी डॉलर का था।
आयात शुल्क बढ़ने से घरेलू खरीदारी में कमी क्यों?
रिपोर्ट का दावा है, हाल में सरकार द्वारा सोने के आयात शुल्क में छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने की वजह से घरेलू बाजार में सोने की खरीदारी में कमी आई है। वहीं सोने की रिकॉर्ड कीमतों में वृद्धि के साथ आयात शुल्क में दोहरे अंकों की वृद्धि ने घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को बढ़ा दिया है। रिपोट कहती है, यदि सरकार आयात शुल्क में कटौती करती हैं, तो सोने का आयात सामान्य स्तर पर वापास आ सकता है।
सोने की रिसाइकलिंग को बढ़ावा देने की जरूरत क्यों?
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है, कराधान संरचना में बदलाव से सोने के आयात को कम करने, परिवारों को मौजूदा सोने का पुनर्चक्रण करने के लिए प्रोत्साहित करने और सरकारी राजस्व की रक्षा करने में सहायता मिल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार हम लंबे समय से सोने पर उच्च जीएसटी दरों और कम आयात शुल्क के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में तर्क दे रहे हैं, जिसमें सोने के आयात को कम किया जा सके, घरेलू स्तर पर सोने की रीसाइक्लिंग बढ़ाया जाना, और सरकारी राजस्व की रक्षा की जा सके। रिपोर्ट कहती है, आयात में कमी से भारत के चालू खाता संतुलन को लाभ होगा, लेकिन इसके परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि यह गिरावट मांग में स्थायी कमी, स्थगित खरीदारी या अनौपचारिक माध्यमों से व्यापार में बदलाव को दिखाई है।