फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

GDP: सितंबर तिमाही में 6.5 प्रतिशत रह सकती है भारत की वृद्धि दर, घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने जताया अनुमान

Wed, 20 Nov 2024 02:41 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Icra on Indian Economy: घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए देश की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.5% कर दिया है। हालांकि, चालू वित्तीय के लिए 7% की वृद्धि दर के अनुमान को बरकरार रखा गया है। आइए जानते हैं रेटिंग एजेंसी ने रिपोर्ट में देश की अर्थव्यवस्था के बारे में और क्या-क्या कहा है।
विज्ञापन
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बुधवार को अनुमान जताया कि भारी बारिश और तिमाही नतीजों में कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन के कारण सितंबर तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, एजेंसी ने वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद के चलते वित्त वर्ष 2025 के लिए विकास दर के अनुमान को 7 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इक्रा की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब शहरी मांग में कमी जैसे अनेक कारकों से विकास में मंदी की चिंता जाहिर की जा रही है। 
विज्ञापन


आरबीआई चालू वित्त वर्ष के लिए 7.2 प्रतिशत की वृद्धि के अपने अनुमान पर कायम है। हालांकि, अधिकांश विश्लेषकों का अनुमान है कि वृद्ध दर 7 प्रतिशत से कम रह सकती है। पिछले कुछ सप्ताहों में कई विश्लेषकों ने वृद्धि दर के अनुमान को कम करने की बात कही है। दूसरी तिमाही की आर्थिक गतिविधि के आधिकारिक आंकड़े 30 नवंबर को प्रकाशित होने की उम्मीद है। पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत थी।

इक्रा ने कहा कि दूसरी तिमाही में वृद्धि दर में गिरावट भारी बारिश और कमजोर कॉर्पोरेट मार्जिन जैसे कारकों के कारण होगी। रिपोर्ट में कहा गया है, "सरकारी खर्च और खरीफ की बुवाई में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर खनन और बिजली क्षेत्र में मंदी आने की आशंका है।"
विज्ञापन


रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवा क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार होने का अनुमान है, जिससे पूरे वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, "वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में संसदीय चुनावों के बाद पूंजीगत व्यय में वृद्धि के साथ-साथ प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई में भी अच्छी वृद्धि दिखी। भारी वर्षा के कारण कई क्षेत्रों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिससे खनन गतिविधि, बिजली की मांग और खुदरा ग्राहकों की संख्या प्रभावित हुई और व्यापारिक निर्यात में भी कमी आई।"

उन्होंने कहा कि अच्छे मानसून का लाभ आगे मिलेगा, और खरीफ उत्पादन में वृद्धि व जलाशयों के पुनः भरने से ग्रामीण भावना में निरंतर सुधार होने की संभावना है। नायर ने कहा कि भारत सरकार के पूंजीगत व्यय के लिए पर्याप्त गुंजाइश है, जिसे पूरे वर्ष के बजट अनुमान को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में वर्ष दर वर्ष आधार पर 52 प्रतिशत बढ़ाने की जरूरत है।

नायर ने कहा, "हम निजी उपभोग पर व्यक्तिगत ऋण वृद्धि में मंदी के प्रभाव के साथ-साथ कमोडिटी की कीमतों और बाहरी मांग पर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रभाव पर भी नजर रख रहे हैं।"

एजेंसी के अनुसार मानसून में अतिरिक्त बारिश के कारण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के धीमे क्रियान्वयन के कारण सुस्ती आई। हालांकि, दूसरी तिमाही में निवेश गतिविधि पहली तिमाही की तुलना में बेहतर रही। एजेंसी ने कहा कि दूसरी तिमाही में नई परियोजनाओं से जुड़ी घोषणाओं में 6.7 लाख करोड़ रुपये की अच्छी वृद्धि देखी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें