महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 की पूर्व संध्या पर पुणे के पूर्व आईपीएस अधिकारी रवींद्रनाथ पाटिल ने बारामती सांसद और एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले व महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले पर गंभीर आरोप लगाए। जिसके बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। भारतीय जनता पार्टी उनके आरोपों के समर्थन में तुरंत कथित वॉयस नोट जारी किए, और दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए बिटकॉइन को भुनाने की साजिश में सुप्रिया सुले और नाना पटोले शामिल थे। आइए जानते हैं आखिर यह बिटक्वाइन बवाल आखिर है क्या।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि बिटक्वाइन घोटाले का उद्देश्य चुनावों में हेराफेरी करना है, जिससे चुनावों की निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा पर सवाल खड़ा होता है। पूर्व आईपीएस अधिकारी ने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने 2018 में क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी के लिए बिटकॉइन का दुरुपयोग किया था और इसका इस्तेमाल महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए किया। रवींद्रनाथ पाटिल ने कहा कि वह इस मामले की जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी ने आरोप लगाया कि पुणे के तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमिताभ गुप्ता और साइबर अपराध जांच को संभालने वाली तत्कालीन पुलिस उपायुक्त भाग्यश्री नौटके भी बिटकॉइन के दुरुपयोग में शामिल थे, जिसका उपयोग आखिरकार दोनों नेताओं ने किया।
भाजपा की ओर से जारी पहले ऑडियो में सारथी एसोसिएट्स ऑडिट फर्म के कर्मचारी गौरव मेहता का पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता को भेजा गया वॉइस नोट है। गौरव अंग्रेजी में कह रहा है- हमने पाटिल और घोडे (पाटिल के सहयोगी) के नाम से 4 क्रिप्टो वॉलेट बनाए थे। इन वॉलेट से लेन-देन हुए थे। अगर कोई जांच होती है, तो इसमें वही दो लोग (पाटिल और घोडे) फंसेंगे। मेरा यकीन करें, कोई भी हम तक नहीं पहुंच सकता
सुप्रिया सुले ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस बात से “आश्चर्यचकित” हैं कि पार्टी (पार्टी) “इस स्तर तक गिरने” को तैयार है। उधर, उनके चचरे भाई अजीत पवार ने कहा है कि वे अपनी बहन और नाना पटोले दोनों को अच्छी तरह से जानते हैं, और ऑडिया में उन्हीं की आवाज है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन दावों का समर्थन किया। त्रिवेदी ने तीन ऑडियो क्लिप जारी करते हुए दावा किया कि वे इस बात के सबूत हैं कि नाना पटोले और सुप्रिया सुले इस “बिटकॉइन घोटाले” में शामिल थे। वहीं, इस प्रकरण के सामने आने के बाद ईडी की टीम बुधवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर पहुंची। यहां बिटकॉइन घोटाले के सिलसिले में गौरव मेहता (सारथी एसोसिएट्स ऑडिट फर्म के कर्मचारी) के ठिकानों पर छापेमारी किए जाने की खबर है।
महाराष्ट्र की विपक्षी नेता सुप्रिया सुले और नाना पटोले पर चुनावों के लिए धन जुटाने हेतु अवैध रूप से बिटकॉइन का उपयोग करने में कथित संलिप्तता का आरोप लगाया है। दावा किया गया है कि जांच के दौरान उनकी भूमिकाएं सामने आएंगी। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और लोकसभा में विपक्ष के नेता से इस मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने को कहा। एक संवाददाता सम्मेलन में पात्रा ने विपक्ष के इस दावे को खारिज कर दिया कि महाराष्ट्र चुनावों के दौरान उन्हें निशाना बनाने की "साजिश" के पीछे भाजपा का हाथ है। उन्होंने दावा किया कि संदिग्ध क्रिप्टो करेंसी धोखाधड़ी कई साल पहले हुई थी और विपक्षी गठबंधन ने पिछले चुनावों में भी इस धन का इस्तेमाल किया था।
भाजपा नेताओं के अनुसार इस घोटाले में अब तक 235 करोड़ रुपये की गड़बड़ी हुई है। उधर, सुले ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने अपनी कथित आवाज ऑडियो रिकॉर्ड को भी खारिज किया है। उन्होंने इन आरोपों को फर्जी बताया है और कहा है कि चुनाव आयोग और महाराष्ट्र पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा, "धार्मिक मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए झूठी सूचना फैलाने की यह जानी-पहचानी रणनीति है।" सुले ने कहा कहा, "इसके पीछे की मंशा और दुर्भावनापूर्ण कार्यवाहियां स्पष्ट हैं, यह निंदनीय है कि इस तरह की प्रथाएं भारत के संविधान से चल रहे एक स्वस्थ लोकतंत्र में हो रही हैं।"
उधर, पात्रा ने दावा किया कि यह मामला तब प्रकाश में आया जब क्रिप्टोकरेंसी कारोबार में शामिल और इस मामले से कथित रूप से जुड़े गौरव मेहता ने सार्वजनिक रूप से सामने आने का फैसला किया। विपक्षी नेताओं की मदद के लिए बिटकॉइन को भुनाने के बाद उन्हें अपनी जान पर खतरे का आभास हो रहा था। भाजपा नेता ने दावा किया कि इस मामले की जड़ें 2018 में हुए क्रिप्टो करेंसी धोखाधड़ी से जुड़ी हैं। उस दौरान एक पूर्व आईपीएस अधिकारी रवींद्रनाथ पाटिल, जिन्हें जांच में मदद करने के लिए एक विशेषज्ञ के रूप में चुना गया था, को ही क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के दुरुपयोग के लिए गिरफ्तार कर लिया गया। पाटिल की टिप्पणियों का हवाला देते हुए पात्रा ने दावा किया घोटाले में दो अन्य आईपीएस अधिकारी भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि मेहता ने तब पाटिल के खिलाफ सबूत दिए थे और सुले व पटोले की कथित आवाज के रिकॉर्ड साझा किए थे। पात्रा ने सुले के बचाव को खारिज करते हुए दावा किया कि पकड़े जाने पर हर संदिग्ध एक जैसी ही बात कहता है।