भारत का विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह में कम हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 16 अक्तूबर 2026 को समाप्त हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.011 अरब डॉलर घटकर 721.016 अरब डॉलर रह गया। इससे पिछले सप्ताह भी विदेशी मुद्रा भंडार में 8.578 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट आई थी। यानी दो सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कुल 13.589 अरब डॉलर कम हो चुका है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब सितंबर की शुरुआत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था।
आरबीआई के मुताबिक, 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.706 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद से इसमें गिरावट का रुख बना हुआ है।
विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) का होता है। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी दूसरी विदेशी मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां भी शामिल होती हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य घटकों में इस सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार:
इन आंकड़ों से साफ है कि विदेशी मुद्रा भंडार के सभी घटकों में गिरावट नहीं आई। फॉरेन करेंसी एसेट्स में बड़ी कमी के बावजूद सोने के भंडार, एसडीआर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की रिजर्व पोजिशन का मूल्य बढ़ा।
विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की बाहरी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने की क्षमता का जरूरी संकेतक है। इसमें विदेशी मुद्राओं, सोने और अन्य निर्धारित रिजर्व परिसंपत्तियों का योगदान होता है। पर्याप्त भंडार उपलब्ध रहने से देश को आयात भुगतान और बाहरी आर्थिक दबावों से निपटने में मदद मिलती है।
जब रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब आरबीआई जरूरत के अनुसार डॉलर बेचकर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। विशेषज्ञों ने मौजूदा गिरावट के संदर्भ में आरबीआई की ओर से की डॉलर बिक्री का उल्लेख किया है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े यह नहीं बताते कि इस सप्ताह डॉलर की बिक्री में कितनी राशि खर्च की गई या रुपये की विनिमय दर पर इसका कितना प्रभाव पड़ा।
आने वाले सप्ताहों में विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों से यह समझने में मदद मिलेगी कि हालिया गिरावट जारी रहती है या इसमें स्थिरता आती है। इसके लिए फॉरेन करेंसी एसेट्स में बदलाव, आरबीआई के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और अन्य रिजर्व घटकों के रुझान पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर के रिकॉर्ड स्तर से नीचे आ चुका है और लगातार दो सप्ताह की गिरावट दर्ज कर चुका है। हालांकि, 721.016 अरब डॉलर का मौजूदा स्तर अपने आप में किसी संकट का प्रमाण नहीं है। इसकी व्यापक स्थिति समझने के लिए गिरावट के कारणों और आगे के आंकड़ों का आकलन जरूरी होगा।