अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वित्तीय प्रणाली पहले से अधिक मजबूत और विविधतापूर्ण हो गई है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण इसने महामारी का भी सफलतापूर्वक सामना किया है। आईएमएफ और विश्व बैंक द्वारा संयुक्त रूप से किए जाने वाले वित्तीय क्षेत्र मूल्यांकन कार्यक्रम (एफएसएपी) के तहत इस अध्ययन को किया गया। आईएमएफ ने भारत-एफएसएसए रिपोर्ट जारी की है, जबकि विश्व बैंक की रिपोर्ट जल्द आने वाली है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2017 के बाद भारत की वित्तीय प्रणाली अधिक मजबूत हुई है। यह 2010 के दशक की वित्तीय समस्याओं से उबर चुकी है और महामारी के प्रभाव को भी झेलने में सक्षम रही। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और बाजार वित्तपोषण का विस्तार हुआ है, जिससे पूरी प्रणाली अधिक विविध और जुड़ी हुई बन गई है। हालांकि, सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी अभी भी बड़ी बनी हुई है।
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बैंकों की स्थिति और पूंजी जरूरतें
आईएमएफ का कहना है कि भारतीय बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में पर्याप्त पूंजी रखते हैं और कठिन समय में भी सीमित मात्रा में ऋण देने में सक्षम रह सकते हैं। लेकिन कुछ सरकारी बैंकों (पीएसबीएस) को अपनी पूंजी को मजबूत करने की जरूरत हो सकती है। कुछ शहरी सहकारी बैंक (यूबीसीएस) और छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों कमजोर स्थिति में हो सकते हैं। हालांकि, अल्पकालिक नकदी संकट का खतरा फिलहाल नियंत्रण में है।
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और शेयर बाजार पर निगरानी मजबूत
आईएमएफ ने कहा कि भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए बनाई गई स्केल-आधारित नियामक व्यवस्था प्रभावी है। साथ ही, बड़े गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए बैंक जैसी एलसीआर लागू करने की सराहना की गई। शेयर बाजार से जुड़े जोखिमों को रोकने के लिए भारत के नियामक ढांचे में सुधार किया गया है। कॉरपोरेट डेट मार्केट डेवलपमेंट फंड (सीडीएमडीएफ) की स्थापना को एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।
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बीमा और साइबर सुरक्षा मजबूत
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत का बीमा क्षेत्र (जीवन और सामान्य बीमा दोनों) स्थिर है और तेजी से बढ़ रहा है। इसमें डिजिटल नवाचारों और बेहतर नियमन की अहम भूमिका है। साथ ही, आईएमएफ ने भारत में बैंकों, वित्तीय बाजारों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की साइबर सुरक्षा प्रणाली का विश्लेषण किया। यह पाया गया कि बैंकों के लिए साइबर सुरक्षा निगरानी में भारत ने काफी प्रगति की है। हालांकि, पूरी वित्तीय प्रणाली के लिए बड़े स्तर पर साइबर सुरक्षा परीक्षणों की जरूरत है, जिससे भविष्य में किसी भी बड़े साइबर हमले से बचाव किया जा सके।