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टाटा संस: 'भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार से मिलेगी सतत वृद्धि', और क्या बोले चंद्रशेखरन

Mon, 05 Oct 2026 05:21 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टाटा संस के अध्यक्ष चंद्रशेखरन ने भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डाला। उन्होंने दीर्घकालिक वृद्धि के लिए ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत विनिर्माण रोजगार और मानव पूंजी में निवेश को महत्वपूर्ण बताया। गुणवत्ता और घरेलू क्षमताओं के विकास पर जोर दिया।
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चंद्रशेखरन - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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टाटा संस के अध्यक्ष चंद्रशेखरन ने कहा है कि अनिश्चित और कठिन वैश्विक माहौल में भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है। उन्होंने सोमवार को इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (आईएफक्यूएम) संगोष्ठी 2026 में यह बात कही। चंद्रशेखरन ने दीर्घकालिक वृद्धि के लिए ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत विनिर्माण रोजगार और मानव पूंजी में निवेश को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को साकार करने पर जोर दिया।

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चंद्रशेखरन ने कहा कि देश कई संकेतकों पर स्थिर और मजबूत स्थिति में है। भारत की वृद्धि मजबूत घरेलू मांग, सेवा निर्यात और अनुकूल नीतिगत माहौल से समर्थित है। उन्होंने ऑटो बिक्री, ऋण वृद्धि, बिजली और सीमेंट जैसे उच्च-आवृत्ति संकेतकों में दोहरे अंकों की मांग का उल्लेख किया। चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के एक फीसदी से कम है। मजबूत सेवा निर्यात, विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकों के कम एनपीए भी अर्थव्यवस्था की मजबूती दर्शाते हैं। उन्होंने गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने और वर्तमान असेंबली-आधारित वृद्धि से हटकर पूर्ण उत्पाद क्षमताओं की ओर बढ़ने पर जोर दिया। चंद्रशेखरन ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लिए विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा, संस्थान और बौद्धिक संपदा आवश्यक हैं।

सतत वृद्धि के लिए क्या आवश्यक है?

चंद्रशेखरन ने कहा कि दीर्घकालिक वृद्धि बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना मौलिक है। उन्होंने उन्नत और सटीक विनिर्माण रोजगारों पर भी बल दिया। कम उत्पादकता वाले कृषि कार्यबल से उच्च उत्पादकता वाले विनिर्माण और आधुनिक सेवाओं की ओर बदलाव जरूरी है। इसके लिए सही क्षेत्रों में निवेश की जरूरत है। मानव संसाधनों में निवेश, जैसे शिक्षा और कौशल विकास, भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

गुणवत्ता कैसे नवाचार का चालक बन सकती है?

उन्होंने गुणवत्ता को केवल एक परिणाम के रूप में न देखने की सलाह दी। टोयोटा का उदाहरण देते हुए, उन्होंने बताया कि गुणवत्ता नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता का प्रमुख चालक बनी। जर्मनी जैसे राष्ट्रों ने गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करके अपनी राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बदली। भारत को भी उत्पादों की इंजीनियरिंग, मानक निर्धारण और आपूर्तिकर्ता पारिस्थितिकी तंत्र में ऐसे बदलाव की आवश्यकता है। भारतीय विनिर्माताओं को गुणवत्ता के साथ सतत विनिर्माण प्रक्रियाओं को एकीकृत करना चाहिए।

भारत को विनिर्माण में किस बदलाव की जरूरत है?

चंद्रशेखरन ने असेंबली-आधारित वृद्धि से अंत-से-अंत तक घरेलू क्षमता की ओर बढ़ने का सवाल उठाया। असेंबली-आधारित वृद्धि मजबूत एसएमई खंड बनाने में महत्वपूर्ण है। लेकिन पूर्ण उत्पाद और क्षमताओं की एक शृंखला बनाने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश चाहिए। बौद्धिक संपदा का निर्माण और बाजार के साथ तालमेल बिठाना भी जरूरी है। उन्होंने उत्पादों के साथ-साथ आवश्यक उपकरण और कौशल सेट बनाने पर जोर दिया। व्यावसायिक कौशल पर ध्यान केंद्रित करना और गुणवत्ता को हर चीज के केंद्र में रखना महत्वपूर्ण है।

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