वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने बताया कि चीन में भारी मंदी, पेट्रोलियम की कीमतों में गिरावट, यूरोप में मंदी और परिवहन व लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों ने वस्तु निर्यात को प्रभावित किया। वित्तीय वर्ष के पहले तीन महीनों (अप्रैल-जून) के दौरान भारत से निर्यात में सालाना आधार पर 5.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह आंकड़ा 109.9 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया।
वाणिज्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक मांग में कमी और भू-राजनीतिक चुनौतियों के कारण अगस्त में भारतीय वस्तुओं का निर्यात 9.3 प्रतिशत घटकर 34.7 अरब डॉलर रह गया। वहीं, इस महीने देश में आने वाले शिपमेंट यानी आयात में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 64.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस तरह अगस्त में देश का व्यापार घाटा 29.65 अरब डॉलर हो गया।
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वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने बताया कि चीन में भारी मंदी, पेट्रोलियम की कीमतों में गिरावट, यूरोप में मंदी और परिवहन व लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों ने वस्तु निर्यात को प्रभावित किया। वित्तीय वर्ष के पहले तीन महीनों (अप्रैल-जून) के दौरान भारत से निर्यात में सालाना आधार पर 5.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह आंकड़ा 109.9 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया।
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के वैश्विक व्यापार परिदृश्य और सांख्यिकी ने अप्रैल में कहा था कि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं, विशेष रूप से यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति के प्रभाव के कारण 2023 में संकुचन के बाद 2024 और 2025 में विश्व वस्तु व्यापार की मात्रा में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है।
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इसमें कहा गया, "हम उम्मीद करते हैं कि 2023 में 1.2 प्रतिशत की गिरावट के बाद 2024 में वैश्विक व्यापार 2.6 प्रतिशत और 2025 में 3.3 प्रतिशत बढ़ेगा।" बहुपक्षीय व्यापार निकाय ने चेतावनी दी थी कि क्षेत्रीय संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में इजाफा कर व्यापार में वृद्धि को सीमित कर सकते हैं।