भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ वित्त वर्ष 2022 और वित्त वर्ष 2023 दोनों में 9 फीसदी की दर से बढ़ेगी। रेटिंग एजेंसी इकरा ने मंगलवार को यह अनुमान जताया। एजेंसी का यह अनुमान ऐसे समय में जताया है, जब कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के चलते एक तरह से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
रेटिंग एजेंसी ने इस बात पर जोर डाला कि वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही के लिए मौजूद आंकड़े इस बात का पुख्ता सबूत नहीं देते हैं कि मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) कमेटी ने टिकाऊ ग्रोथ रिकवरी के जो दायरा रखा है, उसे हासिल कर लिया गया है। ऐसे में फरवरी 2022 में नीतिगत रुख को बदलकर 'न्यूट्रल' करने की पुष्टि नहीं की जा सकती है। मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि अर्थव्यवस्था के लिए अहम 13 संकेतकों में से सात संकेतक कोरोना-पूर्व स्तर से अधिक ग्रोथ की ओर इशारा कर रहे हैं। इनमें जीएसटी ई-वे बिल जनरेशन (+26.7 प्रतिशत), नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट ( +26.0 प्रतिशत), रेल माल ढुलाई (+20.2 प्रतिशत), कोल इंडिया लिमिटेड आउटपुट (+15.7 प्रतिशत), बिजली उत्पादन (+9.9 प्रतिशत), पेट्रोल खपत (+6.4 प्रतिशत) और बंदरगाहों पर कार्गो यातायात (+4.0 प्रतिशत) शामिल हैं।