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AI Summit Live: अमिताभ कांत बोले- भारत AI को अमेरिका से 33% ज्यादा डेटा दे रहा, हमें अपना LLM विकसित करना होगा

Tue, 17 Feb 2026 12:09 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

AI Summit India 2026: नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां ग्लोबल साउथ, खासकर भारत के डेटा से अपने एआई मॉडल तैयार कर रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि समान लाभ सुनिश्चित करने के लिए भारत और विकासशील देशों को अपने डेटा पर आधारित स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने चाहिए।
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एआई इम्पैक्ट समिट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां ग्लोबल साउथ देशों के डेटा का उपयोग अपने लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) को ट्रेन करने में कर रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत और अन्य विकासशील देशों को एआई से समान लाभ पाने के लिए अपने स्वयं के डेटा पर आधारित मॉडल विकसित करने चाहिए।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एक पैनल चर्चा के दौरान कांत ने बताया कि एलएलएम के प्रशिक्षण में ग्लोबल साउथ के डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका है और भारत अकेले अमेरिका से भी लगभग 33 प्रतिशत अधिक डेटा उपलब्ध कराता है। उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक टेक कंपनियां इस डेटा के आधार पर अपने व्यावसायिक उत्पाद तैयार कर सकती हैं और बाद में उन्हें ऊंची कीमत पर बाजार में बेच सकती हैं।

साथ ही उन्होंने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय ताकत और तकनीकी महत्वाकांक्षा उसे वैश्विक एआई दौड़ में विशिष्ट स्थान देती है। उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी और एआई के प्रति बढ़ती रुचि इस तकनीक की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाती है।

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स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का बढ़ता उपयोग

स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि एआई डॉक्टरों का विकल्प नहीं है, बल्कि उनके नियमित कार्यों का बोझ कम करने में सहायक तकनीक है।

पत्रकारों से बातचीत में पटेल ने कहा कि एआई चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय और उपचार की जिम्मेदारी डॉक्टरों की ही रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई का उद्देश्य डॉक्टरों को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उन्हें समर्थन देना है ताकि वे अधिक जटिल और गंभीर मामलों पर बेहतर ध्यान दे सकें। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई साक्षरता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, अदक मेडिकल समुदाय एआई तकनीक को बेहतर ढंग से समझे और अपनाए, तो इससे समावेशिता और स्वास्थ्य समानता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।  

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रक्षा क्षेत्र में AI के उपयोग पर जोर, भारतीय सेना मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए तैयार

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) द्वारा आयोजित 'रक्षा क्षेत्र में एआई का उपयोग: नवाचार और दक्षता को बढ़ावा देना' सेमिनार में मेजर जनरल विक्रमजीत सिंह वराइच ने कहा कि भारतीय सेना रक्षा बलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक उपयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग के साथ साझेदारी, सह-अध्यक्षता और साझा दृष्टि के माध्यम से सेना वैश्विक स्तर के सर्वोत्तम समाधान विकसित करने पर काम कर रही है, जिससे ऑपरेशनल दक्षता, कमांडरों की क्षमता और जमीनी स्तर पर तैनात सैनिकों को बड़ा लाभ मिलेगा। मेजर जनरल वराइच के अनुसार भारतीय सेना केवल AI ही नहीं बल्कि क्वांटम और उन्नत संचार जैसी कोर टेक्नोलॉजी को भी लागू करने के मार्ग पर है। उन्होंने बताया कि सेना के नेटवर्क अब एकीकृत हो चुके हैं और बल मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए तैयार है।
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