कोरोना के चलते बंदी की वजह से कई लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। काम बंद होने से वह अपने गांव की ओर लौट गए। वहीं लॉकडान के बीच बढ़ती महंगाई लोगों की कमर तोड़ रही है। दैनिक क्रिया में प्रयोग किए जाने से लेकर खाद्य तेल तक काफी महंगे हो गए हैं। तेल की बढ़ी कीमत ने भोजन का जायका बिगाड़ दिया है। इससे गृहणियां परेशान है। लोगों को घर का खर्च भी चलाना मुश्किल हो रहा है। लेकिन अब केंद्र सरकार जल्द ही कीमत में कटौती के लिए एक बड़ा कदम उठा सकती है।
टैक्स घटाने की तैयारी कर रही सरकार
जनता को राहत देने के लिए सरकार टैक्स घटाने की तैयारी कर रही है। खाद्य तेलों में आयात कर को घटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के हवाले से इसकी जानकारी दी है। आयात कर घटने से घरेलू बाजार में तेलों की कीमतें कम होंगी और साथ ही इसकी खपत भी बढ़ेगी। इससे मलयेशिया से आयात होने वाले पाम ऑयल, सोया ऑयल, सनफ्लावर ऑयल के आयात को सहारा मिलेगा और घरेलू सरसों, सोयाबीन और मुंगफली तेल के दाम भी घटेंगे।
200 रुपये प्रति लीटर तक पहुंची कीमत
गौरतलब है कि भारतीय बाजारों में खाद्य तेलों की कीमतें 170-180 रुपये प्रति लीटर से 200 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। इससे किचन के साथ-साथ नाश्ते में इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं।
भारत अपनी कुल खाद्य तेल की जरूरत का 70 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसके लिए भारत भारी कीमत चुका रहा है। वर्ष 1994-95 में भारत अपनी कुल जरूरत का केवल 10 फीसदी हिस्सा खाद्य तेल आयात करता था। एक अनुमार के अनुसार, केवल खाद्य तेलों के आयात पर भारत प्रति वर्ष 75 से 80 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है जो भारत के कुल आयात का लगभग 2.5 फीसदी है।