कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के कारण अनिश्चितता के बीच रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम करके 9.5 फीसदी कर दिया। इससे पहले वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि 10.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा के परिणाम की घोषणा करते हुए कहा कि कोविड-19 संक्रमण और मृतकों की संख्या में अचानक वृद्धि से अर्थव्यवस्था में सुधार की जो शुरुआत हुई थी वह कमजोर पड़ गई। हालांकि, यह पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई।
लगातार नई सोच और विचारों पर काम करेगा रिजर्व बैंक
आर्थिक वृद्धि गतिविधियां अभी जीवित हैं। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर दूसरी लहर के दौरान आपूर्ति परिस्थितियों ने इस दौरान अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया। रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि रिजर्व बैंक 'लगातार नई सोच और विचारों पर काम करेगा।' इस दौरान वह सबसे बुरे समय को ध्यान में रखते हुए योजना बनाएगा और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ आगे बढ़ेगा।
रिजर्व बैंक ने इससे पहले अप्रैल में हुई मौद्रिक नीति की समीक्षा में 2021-22 के दौरान आर्थिक वृद्धि 10.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। देश के सकल घरेलू उत्पाद में पिछले वित्त वर्ष यानी 2020-21 में 7.3 फीसदी की गिरावट आई है। पिछले वित्त वर्ष की शुरुआत जहां भारी गिरावट के साथ हुई थी, वहीं चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था वृद्धि की राह पर लौटी और जनवरी-मार्च 2021 तिमाही में 1.6 फीसदी वृद्धि हासिल की गई। इससे पिछली तिमाही में जीडीपी में 0.5 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई थी।
तिमाही-दर-तिमाही इतनी होगी वृद्धि दर
आरबीआई गवर्नर ने मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद कहा, 'वास्तविक जीडीपी वृद्धि अब 2021-22 के दौरान 9.5 फीसदी रहेगी। वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में 18.5 फीसदी, दूसरी तिमाही में 7.9 फीसदी, तीसरी तिमाही में 7.2 फीसदी और चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है।'
चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर 5.1 फीसदी रहने का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति की दर 5.1 फीसदी पर रहने का अनुमान लगाया। यह मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के मुद्रास्फीति को चार फीसदी (दो फीसदी ऊपर या नीचे) के दायरे में बनाए रखने के लक्ष्य के अनुरूप है। वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मुद्रास्फीति 5.2 फीसदी, दूसरी में 5.4 फीसदी, तीसरी में 4.7 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.3 फीसदी रहने का अनुमान है।