आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर कहा कि भारत में फिनटेक क्रांति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। दास ने गुरुवार को टोक्यो में एक संगोष्ठी में कहा कि यूपीआई की सफलता की कहानी वास्तव में एक अंतरराष्ट्रीय मॉडल बन गई है। मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से बैंक खातों के बीच तुरंत धन हस्तांतरण करने की इसकी क्षमता ने लोगों के डिजिटल लेनदेन के तरीके को बदल दिया है। इसके अलावा, यूपीआई को अन्य देशों की तेज भुगतान प्रणालियों के साथ जोड़ने का भी काम जारी है। फिनटेक का लाभ उठाने के साथ सीमापार से भुगतान को अधिक कुशल और सस्ता बनाने के लिए भारत और जापान की तेज भुगतान प्रणालियों को जोड़ने की संभावना का पता लगाया जा सकता है।
फिनटेक परिवेश
दास टोक्यो में उद्योग मंडल टोक्यो चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में भारतीय आर्थिक अध्ययन संस्थान की भारतीय अर्थव्यवस्था पर संगोष्ठी में कहा, आरबीआई का वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) परिवेश ग्राहक केंद्रित है। बेहतर संचालन व्यवस्था, प्रभावी निरीक्षण, नैतिक रूप से उपयुक्त गतिविधियां, जोखिम प्रबंधन सुनिश्चित करने और स्व-नियामक संगठन के माध्यम से फिनटेक के स्व-नियमन को प्रोत्साहित करने पर जोर है।
हालिया उतार-चढ़ाव के बीच जीडीपी की रफ्तार रही मजबूत
भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर दास ने कहा, यह संतोष की बात है कि हाल के वर्षों में उतार-चढ़ाव भरे हालात में भी यह सुगमता से आगे बढ़ी है। अपनी अंतर्निहित मजबूती और सूझबूझ के साथ नीतिगत उपायों से वृद्धि को गति व मजबूती मिल रही है। हमारा आर्थिक प्रदर्शन महामारी के समय से सोच-विचार कर किए गए उपायों, उपयुक्त मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों के दम पर बेहतर रहा है। हालांकि, मौजूदा अनिश्चित माहौल में आत्मसंतुष्टि की गुंजाइश नहीं है।
मूडीज : मजबूत घरेलू मांग से भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि को मिलेगी गति
मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने 2023 के लिए भारत के आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को 6.7 फीसदी पर बरकरार रखा है। 2024 में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर 6.1 फीसदी और 2025 में 6.3 फीसदी रह सकती है। मूडीज ने बृहस्पतिवार को कहा, घरेलू मांग में बढ़ोतरी निकट भविष्य में जीडीपी को आगे बढ़ा रही है। भारत की वृद्धि दर जून तिमाही में 7.8 फीसदी व मार्च तिमाही में 6.1 फीसदी रही थी। उच्च कीमतों पर मूडीज ने कहा, मुख्य महंगाई भी अगस्त में 4.8 फीसदी से कम होकर 4.5 फीसदी रह गई। लेकिन, असमान मौसम व भूराजनीतिक अनिश्चितता के बीच महंगाई पर जोखिम दिख रहा है।
तेज वृद्धि को टिकाऊ अर्थव्यवस्था से जोड़ने की जरूरत : सेबी सदस्य
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया ने कहा, भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक वृद्धि को एक टिकाऊ अर्थव्यवस्था में तब्दील होने की जरूरत है। वित्त बाजार स्थायी वित्त को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अंतरराष्ट्रीय वित्त सम्मेलन में उन्होंने कहा, भारत सहित कई देशों ने पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कदम उठाए हैं।