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Tariff Crisis: टैरिफ संकट के बीच केंद्र का बड़ा दांव, विनिर्माण बढ़ाकर 2035 तक निर्यात तीन गुना करने का लक्ष्य

Sat, 24 Jan 2026 05:56 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला, ब्यूरो/एजेंसी

सार

वैश्विक टैरिफ संकट के बीच केंद्र सरकार 15 प्रमुख क्षेत्रों में विनिर्माण बढ़ाकर 2035 तक निर्यात तीन गुना करने की योजना बना रही है। लालफीताशाही घटाने और हब विकसित करने पर जोर है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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वैश्विक अनिश्चितता और उच्च टैरिफ संकट के बीच भारत भारी खर्च करने के बजाय रणनीतिक बदलावों के जरिये विनिर्माण को बढ़ावा देकर 2035 तक देश के निर्यात को तीन गुना करने की योजना बना रहा है। दो सरकारी अधिकारियों ने बताया, इसके लिए प्रधानमंत्री की तीसरी ऐसी कोशिश में देश 15 क्षेत्रों में विनिर्माण को प्राथमिकता दे रहा है, जिसमें हाई-एंड सेमीकंडक्टर, मेटल और श्रम आधारित लेदर इंडस्ट्री शामिल हैं। इसका मकसद भारत की आर्थिक वृद्धि को बढ़ाना और माल निर्यात को सालाना 1.3 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाना है।

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दरअसल, मोदी सरकार जीडीपी में विनिर्माण का हिस्सा दोगुना कर 25 फीसदी करने में दो बार नाकाम रही है। पहला...2014 में मेक इन इंडिया अभियान के जरिये और दूसरा... 2020 में 23 अरब डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज के साथ। नीति निर्माताओं में शामिल एक अधिकारी ने बताया, पिछले कुछ वर्षों में सरकार की कई पहलों के बावजूद विनिर्माण में धीमी वृद्धि देखने को मिली है। अब तीसरी कोशिश में बदलाव लाने के लिए एक साहसिक, फोकस्ड और एकजुट रणनीति की जरूरत है। ब्यूरो/एजेंसी

लालफीताशाही कम करने पर जोर
अधिकारियों ने बताया, सरकार ने योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए एक पैनल बनाया है, जिसका फोकस बड़ी परियोजनाओं के लिए तेज नियामकीय मंजूरी, जमीन और सस्ता फाइनेंस उपलब्ध कराने पर होगा। इस पैनल की अध्यक्षता एक मंत्री करेंगे, जिसमें कैबिनेट सचिव सहित नौकरशाह भी शामिल होंगे। विनिर्माण हब की पहचान मौजूदा इन्फ्रा, भौगोलिक फायदों और बंदरगाहों से नजदीकी के आधार पर की गई है। यह पैनल विनिर्माण हब के लिए सस्ती बिजली आपूर्ति कराने को राज्यों के साथ काम करेगा। 
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विनिर्माण हब पर खर्च होंगे 100 अरब रुपये
अधिकारियों ने बताया, सरकार लक्षित क्षेत्रों में करीब 30 विनिर्माण हब के लिए बुनियादी ढांचा बनाने पर लगभग 100 अरब रुपये खर्च करेगी। वहीं, चिप्स और एनर्जी स्टोरेज जैसे एडवांस्ड एरिया के लिए 21.8 करोड़ डॉलर का ग्रांट देगी।
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