ब्रिटेन के जो व्यवसाय बदल रही वैश्विक धारणाओं के मद्देनजर चीन का विकल्प तलाश रहे हैं, भारत उनके लिए आकर्षक गंतव्य है। उद्योग संगठन ब्रिटेन-भारत व्यवसाय परिषद (यूकेआईबीसी) ने यह राय व्यक्त की है। यूकेआईबीसी के पहले भारतीय समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जयंत कृष्ण ने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्हें ब्रिटेन और भारत के बीच व्यापार के बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि दोनों देश कोरोना वायरस संकट से उबरने लगे हैं।
वित्त वर्ष 2019-20 में इतना रहा था दोनों देशों का व्यापार
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के व्यवसाय भारत के 'आत्मनिर्भर भारत अभियन' का समर्थन करने में दिलचस्पी ले रहे हैं। वित्त वर्ष 2019-20 में दोनों देशों का आपसी व्यापार साल भर पहले के 16.87 अरब डॉलर की तुलना में कुछ कम होकर 15.5 अरब डॉलर रहा था।
ब्रिटेन के उद्योगों का भारत में है खासा निवेश
कृष्ण ने कहा कि, 'ब्रिटेन और भारत व्यावसायिक धारणाओं से उभर रहे अवसरों के मद्देनजर चीन के विकल्प के तौर पर विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला की संभावनाएं तलाश रहे हैं।' उन्होंने माना कि ब्रिटेन के उद्योगों का भारत के विभिन्न क्षेत्रों में खासा निवेश है और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के वैकल्पिक स्थलों की तलाश करने वाले व्यवसायों के लिए एक आकर्षक गंतव्य है।
एक-दूसरे के पूरक हैं भारत और ब्रिटेन
यूकेआईबीसी समूह ने कहा कि, 'इसके अलावा, ब्रिटेन के व्यवसाय विनिर्माण, अनुसंधान और विकास के लिए भारत को वृद्धि के आधार के रूप में देखते हैं तथा आगे भी वे ऐसे ही देखेंगे।' उन्होंने कहा कि भारत की जरूरतों और ब्रिटेन के पेशकश एक-दूसरे के पूरक हैं।