AEPC ने कहा कि जापानी बाजारों से चीनी रेडीमेड परिधानों की हिस्सेदारी घटती जा रही है। यह भारत के लिए बड़ा अवसर है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में भारत जापान के साथ अपना व्यापार बढ़ा सकता है। 2024 में जापान में भारत का परिधान निर्यात 234.5 मिलियन डॉलर का था।
रेडीमेड परिधानों के सबसे बड़े निर्यातक चीन की जापान में घटती हिस्सेदारी के बीच भारत इस खाली स्थान को भर सकता है। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC) ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की।
टोक्यो में आयोजित होगा इंडिया टेक्स ट्रेंड
एईपीसी के अध्यक्ष सुधीर सेखरी ने बताया कि परिषद एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ टोक्यो जा रही है, ताकि शीर्ष जापानी ब्रांडों और खुदरा श्रृंखलाओं के साथ व्यापार और निवेश को बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा करेगी। यह प्रतिनिधिमंडल 15 से 17 जुलाई तक टोक्यो में आयोजित होने वाले इंडिया टेक्स ट्रेंड मेले में भाग लेगा। फेयर में भारत के 150 से अधिक परिधान निर्यातक भाग लेंगे और घरेलू परिधानों की विविध रेंज पेश करेंगे।
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मुक्त व्यापार समझौते का अधिक उपोयग
सेखरी ने कहा कि जापानी बाजार के साथ गहरी भागीदारी के परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते का अधिक उपोयग हुआ है। उन्होंने कहा कि चीन की घटती हिस्सेदारी से बने अवसर का भारत पूरी तरह फायदा उठा सकता है।
2024 में हुआ था 234.5 मिलियन डॉलर का निर्यात
2024 में जापान में भारत का परिधान निर्यात 234.5 मिलियन डॉलर का था। पिछले साल टोक्यो ने लगभग 23 अरब डॉलर मूल्य के इन सामानों का आयात किया था। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल एक प्रतिशत है।
भारतीय आपूर्तिकर्ता की स्थिति अच्छी बनी हुई है
सेखरी ने कहा कि जापानी कंपनियां लागत, गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति पर विशेष ध्यान देती हैं। भारतीय आपूर्तिकर्ता इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। इनमें 200 पीस के छोटे, अनुकूलित उच्च-मूल्य के ऑर्डर से लेकर एक ही स्टाइल के 3 लाख पीस तक के बड़े ऑर्डर शामिल हैं।