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Report: FY2026 की पहली तिमाही में भारत की उपभोग मांग में सुधार, बीओबी की रिपोर्ट में किया गया यह दावा

Fri, 11 Jul 2025 04:47 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मुद्रास्फीति अनुकूल बनी हुई है, यह आगे चलकर नरम मौद्रिक नीति की संभावना का संकेत है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस्पात की खपत में वृद्धि ने गति पकड़ी है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 (Q1FY26) की पहली तिमाही में उपभोग मांग में सुधार के संकेत दे रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक हालिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में उन संकेतकों के बारे में बताया गया है, जो पिछली तिमाही की तुलना में विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी की ओर इशारा करते हैं।

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रिपोर्ट में कहा गया है, "Q1FY26 के लिए अब तक उपलब्ध उच्च आवृत्ति डेटा दर्शाता है कि पिछली तिमाही की तुलना में उपभोग मांग में सुधार हो रहा है.... घरेलू मुद्रास्फीति अनुकूल बनी हुई है जो नरम मौद्रिक नीति का संकेत देती है"। 

रिपोर्ट के अनुसार नरम मौद्रिक नीति आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। निवेशक 1 अगस्त की समय सीमा से पहले भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते हो जाएगा, ऐसा मानकर चल रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो रुपये को और समर्थन मिल सकता है।
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रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मुद्रास्फीति अनुकूल बनी हुई है, यह आगे चलकर नरम मौद्रिक नीति की संभावना का संकेत है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस्पात की खपत में वृद्धि ने गति पकड़ी है। इसका मतलब है कि बुनियादी ढांचे और निर्माण गतिविधियों में वृद्धि आ सकती है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक आयात में वृद्धि हुई है। जो घरेलू और औद्योगिक मांग में वृद्धि हो का संकेत है। पहली तिमाही के दौरान केंद्र सरकार का राजस्व व्यय भी बढ़ा है, इससे पता चलता है कि उपभोग को मजबूती मिल रही है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में भी सुधार हुआ है। सेवा क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई), वाहन पंजीकरण, डीज़ल खपत, राज्यों का राजस्व संग्रह और ई-वे बिल जनरेशन जैसे संकेतकों ने वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में उच्च गतिविधि स्तर दर्शाया। मानसून की गतिविधि भी अच्छी रही है, 9 जुलाई, 2025 तक वर्षा दीर्घावधि औसत (एलपीए) से 15 प्रतिशत अधिक रही। इससे ग्रामीण मांग और कृषि को और समर्थन मिल सकता है। 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चौथी तिमाही की तुलना में पहली तिमाही में सेवा और विनिर्माण पीएमआई दोनों में सुधार हुआ है। पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन, पूंजीगत व्यय व्यय और नई परियोजनाओं की घोषणाओं का प्रदर्शन भी पहली तिमाही में अच्छा रहा।

हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि मनरेगा (घरेलू) के तहत काम की मांग धीमी रही और दोपहिया वाहनों की बिक्री में कुछ कमी देखी गई। टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं और एफएमसीजी उत्पादन में भी नरमी देखी गई। व्यापक आर्थिक मोर्चे पर, रिपोर्ट में बताया गया है कि जून 2025 में मामूली सुधार के बाद, जुलाई में भारत के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में कुछ स्थिरता देखी गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद, जुलाई 2025 में भारतीय रुपया (INR) मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है। 

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