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आरसीईपी में भारत को 11 सदस्य देशों के साथ सबसे ज्यादा व्यापार घाटा

Mon, 20 May 2019 12:47 AM IST
गौरव द्विवेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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एशिया-प्रशांत और दक्षिण एशियाई देशों के बीच व्यापार बढ़ाने को बनाए गए क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) में शामिल 16 देशों में से सबसे ज्यादा व्यापार घाटा भारत को हो रहा है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2018-19 में भारत को इस समूह के 11 देशों के साथ व्यापार घाटा सहना पड़ा है।

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दरअसल, नवंबर 2012 में बनाए गए आरसीईपी में आसियान समूह के 10 सदस्य और मुक्त व्यापार क्षेत्र (एफटीए) के छह सदस्य देश शामिल हैं। 

व्यापार आंकड़ों के अनुसार, 2018-19 में ब्रुनेई, जापान और मलयेशिया के साथ भारत के व्यापार घाटे में मामूली बढ़ोतरी हुई और यह क्रमश: 0.5 अरब डॉलर, 7.1 अरब डॉलर और 3.8 अरब डॉलर रहा है। हालांकि, आस्ट्रेलिया के साथ व्यापार घाटा पिछले साल के 10 अरब डॉलर से घटकर 8.9 अरब डॉलर, चीन के साथ 63 अरब डॉलर से घटकर 50.2 अरब डॉलर, इंडोनेशिया के साथ 12.5 अरब डॉलर से 10.1 अरब डॉलर, कोरिया के साथ 11.9 अरब डॉलर से 11 अरब डॉलर, न्यूजीलैंड के साथ 0.3 अरब डॉलर से 0.2 अरब डॉलर और थाईलैंड के साथ 3.5 अरब डॉलर से घटकर 2.7 अरब डॉलर पर आ गया है। सबसे बड़ा बदलाव सिंगापुर के साथ दिखा जहां 2017-18 में भारत को 2.7 अरब डॉलर का व्यापार लाभ हुआ था, जो 2018-19 में 5.3 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में तब्दील हो गया। 

घरेलू उत्पादकों पर होगा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापार घाटे में लगातार इजाफा होने से घरेलू उत्पादकों पर बुरा असर पड़ेगा। निर्यात के मुकाबले आयात बढ़ने से असंतुलन पैदा होगा, जिसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। हालांकि, कई विश्लेषकों का मानना है कि इस भागीदारी में भारत को अन्य देशों का बड़ा बाजार हासिल होता है, लेकिन उसका लाभ उठाने के लिए हमें अपना निर्यात बढ़ाने पर जोर देना होगा।

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