भारत गुरुवार को हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते में ब्रिटेन के कार्बन कर से छूट हासिल करने में असमर्थ रहा है। इस कदम से ब्रिटेन को भारत के कार्बन-गहन निर्यात पर असर पड़ेगा। थिंक टैंक जीटीआरआई ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की है। हालांकि, सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि भविष्य में ब्रिटेन की ओर से कार्बन टैक्स लगाया जाता है तो भारत के पास कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित है।
सूत्रों के अनुसार, भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते में ब्रिटेन के प्रस्तावित कार्बन कर पर कोई प्रावधान शामिल नहीं है। लेकिन यदि भविष्य में ऐसा कोई कर लगाया जाता है तो भारत को घरेलू निर्यात पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाने का अधिकार होगा।
दिसंबर 2023 में यूके सरकार ने 2027 से कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को लागू करने का निर्णय लिया।
सूत्रों ने बताया कि भारत ने व्यापार समझौते पर बातचीत के दौरान इस मुद्दे को उठाया था। 24 जुलाई को व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसका उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 56 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना करना है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा समझौते में नहीं है क्योंकि ब्रिटेन ने अभी तक कर को अधिसूचित नहीं किया है।
सूत्रों ने कहा, "लेकिन यदि इसे लागू किया जाता है और यदि यह समझौते के तहत भारत के व्यापारिक लाभों को नकारता है, तो भारत को इसे पुनर्संतुलित करने की स्वतंत्रता होगी। इस बारे में सहमति पत्र पर मौखिक सहमति बन चुकी है।"