भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का लोहा एक बार फिर मनवाया है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार भारत ना केवल दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस हासिल करने वाला देश बना हुआ है, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड उच्च स्तर के करीब पहुंच गया है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 23 जनवरी तक 709.413 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण स्वर्ण भंडार और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों दोनों में उछाल था।
पिछले कुछ हफ्तों से, विदेशी मुद्रा बाजार में काफी तेजी देखी जा रही है। इसका पिछला उच्चतम स्तर 704.89 अरब डॉलर था, जो सितंबर 2024 में दर्ज किया गया था। इस भंडार के जरिये देश लगभग 11 महीनों के आयात को कवर कर सकता है। साथ ही यह देश के कुल बकाया विदेशी कर्ज के 94 फीसदी हिस्से के बराबर है।
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का अहम पैमाना होता है। यह न सिर्फ अर्थव्यवस्था की सेहत को दर्शाता है, बल्कि विनिमय बाजार में मुद्रा को संतुलित बनाए रखने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतार-चढ़ाव के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बनता है, तब केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार के जरिए हस्तक्षेप कर रुपये की गिरावट को थाम सकता है। यही वजह है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार को आर्थिक सुरक्षा कवच के तौर पर देखा जाता है।
रिपोर्ट किए गए सप्ताह के लिए, भारत की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (एफसीए), जो विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक है, 562.885 अरब डॉलर रही, जिसमें 2.367 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। आरबीआई के आंकड़ों से पता चला है कि सोने का भंडार वर्तमान में 123.088 अरब डॉलर है, जो पिछले सप्ताह की तुलना में 5.635 अरब डॉलर अधिक है।
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक आर्थिक समस्या से निपटने के लिए एक लिक्विडिटी बफर देता है। दक्षिण एशिया में भारत के अंदर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) जबरदस्त तरीके से आया है। देश ने निवेश के मामले में इंडोनेशिया और वियतनाम को भी पीछे छोड़ दिया। ग्रीनफील्ड निवेश की बात करें तो 2024 में 1,000 से ज्यादा नई परियोजनाओं के साथ भारत दुनिया में चौथे स्थान पर रहा। डिजिटल निवेश के लिए 2020-24 के बीच भारत में 114 अरब डॉलर का सबसे ज्यादा डिजिटल निवेश आया।
दुनिया के कई देश इस समय कर्ज संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत की स्थिति बहुत अच्छी है। देश पर बाहरी कर्ज एवं जीडीपी का रेश्यो सिर्फ 19.2% है और कुल कर्ज का 5 फीसदी से भी कम है। निर्यात बढ़ाने के लिए विनिर्माण लागत को कम करना होगा। नवाचार, उत्पादकता के साथ देश की मुद्रा और जीडीपी को मजबूत किया जा सकता है।