देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग एक बड़े बदलाव के दौर से गुजरा रहा
एआई व इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के जानकार एवं विशेषज्ञ राजीव कौस्तुब कहते हैं कि देश की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना को 1.15 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव मिला है। यह इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए शानदार अवसर है। इससे छोटे और मध्यम आकार के उद्योग को लाभ होगा। साथ ही नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वे कहते हैं कि देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग एक बड़े बदलाव के दौर से गुजरा रहा है, जिसने देश को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक अग्रणी वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पिछले पांच वर्ष में 21 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि (सीएजीआर) दर्ज की गई है और यह वित्त वर्ष 2025 में 16.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसे सरकारी योजनाओं, मजबूत घरेलू मांग और अनुकूल नीतिगत माहौल का समर्थन मिला है।
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के अपनी मजबूत विकास गति को जारी रखेगा और 2030 तक 36 से 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस विकास की गति को सरकारी कार्यक्रमों द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना और आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। इलेक्ट्रिक वाहन, आईओटी उपकरण, सेमीकंडक्टर और एआई समाधानों जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों की बढ़ती मांग इस उद्योग के विकास को और अधिक गति देगी।
ईएसडीएम योजना को 1.15 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव मिला
2 अक्तूबर 2025 को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि सरकार के अधीन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन को 1.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव मिला है। यह योजना देश में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया। इस योजना के लिए पीडीएफ आवेदन 30 सितंबर को बंद हो गए और सरकार को इस योजना के तहत 1,15,351 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सरकार इस योजना के तहत लगभग 59,000 करोड़ रुपये के निवेश प्राप्त करने की परिकल्पना करती है और उसने पूंजीगत उपकरण संग्रह के लिए भी आवेदन खोले हैं। केंद्र ने मार्च 2025 में 22,919 करोड़ रुपये के बजट के साथ छह वर्षों के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना को मंजूरी दी थी।
उद्योग के आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में भारत का ईएसडीएम बाजार 3.1 लाख करोड़ रुपये का है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक बाजार 16.5 लाख करोड़ रुपये और स्मार्टफोन का बाजार 1.9 लाख करोड़ रुपये का है। वैल्यू शेयर के हिसाब से देखें तो, वित्त वर्ष 2025 में स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत, ऑटोमेटिव की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत, एरोस्पेस की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत, इंडस्ट्रीयल और इंडस्ट्रीयल ऑटोमेशन की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत, रिन्यूएबल की 1 प्रतिशत, मास ट्रांपोटेशन 4 प्रतिशत है।