भारतीय अर्थव्यवस्था (सांकेतिक तस्वीर)।
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एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने 2023-24 के लिए भारत के आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को 6 फीसदी पर बरकरार रखा है। साथ ही कहा, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर सबसे अधिक होगी। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती के कारण चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष के विकास दर अनुमानों को अपरिवर्तित रखा गया है।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री (एशिया-प्रशांत) लुइस कुइज ने कहा, मध्यम अवधि के लिए वृद्धि अनुमान अपेक्षाकृत ठोस बना हुआ है। एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाएं 2026 तक हमारे वैश्विक वृद्धि परिदृश्य में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में बनी हुई हैं। वियतनाम और फिलीपीन की वृद्धि दर भी चालू वित्त वर्ष में करीब 6 फीसदी रहेगी। हालांकि, चीन की विकास दर 5.5 फीसदी से 0.3 फीसदी घटकर 5.2 फीसदी रह जाएगी। एजेंसी
5 फीसदी रह सकती है खुदरा महंगाई
एजेंसी ने कहा कि सामान्य मानसून और कच्चे तेल की कीमतों में कमी से महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलेगी। चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई 6.7 फीसदी से घटकर 5 फीसदी पर आ सकती है। आरबीआई अगले साल की शुरुआत में ही ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।
विकसित देशों में मंदी से देश की हर पांचवीं एमएसएमई कंपनी प्रभावित
देश के निर्यात में करीब 40% हिस्सेदारी रखने वाले छोटे उद्यमों को अमेरिका एवं यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों में मंदी के कारण प्रतिकूल हालात का सामना करना पड़ रहा है।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी एवं यूरोपीय बाजारों की भारत के कुल निर्यात में एक तिहाई हिस्सेदारी है। इन देशों में आर्थिक सुस्ती से देश के हर पांचवें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के निर्यात पर असर पड़ सकता है। इस अध्ययन में 69 क्षेत्रों और 147 कलस्टर में सक्रिय एमएसएमई को शामिल किया गया है। इनका कुल राजस्व 63 लाख करोड़ रुपये है, जो पिछले वित्त वर्ष में देश की जीडीपी का करीब एक चौथाई है।
बढ़ानी पड़ सकती है कार्यशील पूंजी
क्रिसिल के निदेशक पुशान शर्मा ने कहा, निर्यात पर केंद्रित एमएसएमई इकाइयों खासकर सूरत एवं अहमदाबाद में रत्न एवं आभूषण, निर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय छोटी कंपनियों को 20-25 दिनों के लिए कार्यशील पूंजी बढ़ानी पड़ सकती है।