भारत ने कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के लिए पिछले एक साल में बड़े सुधार किए हैं। इस मामले में अब वह सिंगापुर को टक्कर दे रहा है। प्रमुख बड़े सुधारों की वजह से विदेशी कंपनियों (विनिर्माता) के लिए भारत आकर्षक गंतव्य के रूप में सामने आ रहा है।
विनिर्माण में निवेश के मोर्चे पर चिंता
ईआईयू ने रिपोर्ट में कहा है कि भारत विनिर्माण में निवेश को लेकर ऐतिहासिक रूप से संघर्ष कर रहा है। दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य उभरते बाजारों से उसे कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। इसके अलावा, अत्यधिक लालफीताशाही और संरक्षणवादी रवैया निवेशकों के लिए चुनौती बना रहेगा।
चीन पर अधिक निर्भरता हमारे लिए मौका
ईआईयू ने रिपोर्ट में कहा है कि एपल समेत कई बड़ी विदेशी कंपनियां आपूर्ति को लेकर चीन पर अधिक निर्भरता और उसकी 'चाइन प्लस वन' नीति से सावधान हो गई हैं। यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। चीन की नीतियों की वजह से एपल चीनी कारखानों पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए भारत में उत्पादन बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
सैमसंग भी करेगी निवेश : सैमसंग ने मार्च में कहा था कि वह उत्पादन को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नोएडा के मोबाइल फोन प्लांट में स्मार्ट विनिर्माण क्षमताएं स्थापित करने में निवेश करेगी।