पहले जानें- भारत और कनाडा के बीच व्यापार के मौजूदा आंकड़े?
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, दोनों देशों के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 8 अरब डॉलर (7.95 अरब डॉलर) का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। इसमें भारत की ओर से कनाडा को होने वाले निर्यात 4.67 अरब डॉलर था, जबकि कनाडा से आयात का आंकड़ा 3.28 अरब डॉलर का था।
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भारत-कनाडा के बीच व्यापार के आंकड़े।
- फोटो : अमर उजाला
भारत और कनाडा के बीच बीते पांच वित्त वर्षों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो सामने आता है कि जहां 2021 से 2024 के बीच दोनों देशों का व्यापार लगातार बढ़ता रहा तो वहीं 2024 के बाद इसमें कमी आने लगी। इसकी एक बड़ी वजह दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई कड़वाहट रही। दरअसल, जून 2023 में खालिस्तान समर्थक आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित गुरुद्वारे से निकलते वक्त हत्या हो गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इसके लिए बिना सबूत दिए ही भारत पर आरोप लगा दिए थे। नतीजतन दोनों देशों के बीच न सिर्फ राजनयिक रिश्ते, बल्कि व्यापारिक रिश्तों पर भी बड़ा ब्रेक लग गया और आयात-निर्यात दोनों के ही आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई।
भारत-कनाडा के बीच व्यापार के आंकड़े।
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि, मार्च 2025 में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से हटने और मार्क कार्नी के पीएम बनने के बाद से कनाडा ने एक बार फिर भारत से रिश्ते बेहतर करने की दिशा में कदम बढ़ाए। नतीजतन दोनों देशों का व्यापार एक बार फिर संतुलित स्तर पर आ चुका है। इसी कड़ी में अब दोनों देश अपने रिश्तों को एक व्यापार समझौते के जरिए और मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।
क्यों दोनों देश अब व्यापार समझौते तक जल्द पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं?
- भारत-कनाडा ने व्यापक समझौता को लेकर चर्चाएं इसी साल मार्च में शुरू कीं, जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत दौरे पर आए थे।
- तनावपूर्ण संबंधों के दौर के बाद दोनों देश अपनी रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को रीसेट कर मजबूत बनाना चाहते हैं।
- इस समझौते के जरिए भारत-कनाडा ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
भारत-कनाडा के बीच आयात-निर्यात।
- फोटो : अमर उजाला
दोनों ही देशों की तरफ से मजबूत आर्थिक रिश्ते बनाने की कोशिश की जा रही है। सीईपीए को एक वृहद आर्थिक फ्रेमवर्क के तौर पर स्थापित कने की तैयारी है, जिसके अंतर्गत उत्पाद, सेवाओं, निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, ताकि यह सिर्फ एक टैरिफ कम करने का समझौता न रह सके।
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कैसे एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं भारत-कनाडा?
भारत और कनाडा आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी मोर्चों पर एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में अहम सहयोगी के तौर पर उभर सकते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां दोनों देश अब तक दूसरों पर निर्भर थे।
1. ऊर्जा सुरक्षा और अहम खनिज
भारत को फायदा: तेजी से बढ़ते औद्योगिक विनिर्माण और आर्थिक विस्तार के लिए भारत को विश्वसनीय ऊर्जा और कच्चे माल की जरूरत है। समझौते के बाद कनाडा इन जरूरतों की निर्बाध आपूर्ति के लिए एक स्रोत बन सकता है।
कनाडा को फायदा: कनाडा भारत को एलएनजी, यूरेनियम, उर्वरक, स्वच्छ तकनीक और उन्नत विनिर्माण के लिए जरूरी अहम खनिजों की आपूर्ति कर सकता है, जिससे उसे अपने निर्यात के लिए बड़ा बाजार मिलेगा और उसका भारत से व्यापार घाटा कम हो सकेगा।