प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान गुरुवार को भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए और उसे औपचारिक रूप दिया गया। इस दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारर्मर भी मौजूद रहे। इस समझौते पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उनके ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन रेनॉल्ड ने हस्ताक्षर किए। दोनों देशों को इस समझौते से क्या लाभ होगा आइए जानते हैं विस्तार से।
जीआई संरक्षण के साथ विकसित बाजारों में मिलेगी पहुंच
इसके साथ ही, भारतीय एथनिक एल्कोहलिक पेय को न केवल अपने पारंपरिक भौगोलिक संकेत (जीआई) संरक्षण का लाभ मिलेगा। साथ ही ब्रिटने जैसे विकसित बाजारों तक भी पहुंच प्राप्त होगी, जहां प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
हॉस्पिटैलिटी जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में भी मिलेगा अवसर
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ये पेय अपने अनोखे स्वाद, विशिष्ट फ्लेवर प्रोफाइल और सांस्कृतिक विरासत के साथ ब्रिटिश टम्बलर्स में खास जगह बनाएंगे। उन्होंने कहा कि एफटीए से न केवल स्कॉच व्हिस्की और अन्य के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय शिल्प पेय को ब्रिटेन में जगह दिलाने में मदद मिलेगी, बल्कि हॉस्पिटैलिटी जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में भी ये नए अवसर तलाश सकेंगे।
2030 तक एक अरब डॉलर का लक्ष्य
यह सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो वैश्विक बाजारों में भारतीय मादक पेय पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, यह एक नया क्षेत्र है। सरकार को उम्मीद है कि देश का मादक पेय पदार्थों का निर्यात वर्तमान 370.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक एक अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
भारत के पास वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी संभावनाएं
इससे पहले अप्रैल में, एपीईडीए (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) ने कहा था कि भारतीय मादक पेय पदार्थों की वैश्विक बाजारों में बड़ी संभावनाएं हैं। देश में दुनिया को देने के लिए जिन, बीयर, वाइन और रम सहित कई अच्छे उत्पाद हैं।
पेय पदार्थों के निर्यात में भारत 40वें स्थान पर
भारत वर्तमान में मादक पेय पदार्थों के निर्यात के मामले में विश्व में 40वें स्थान पर है। देश का लक्ष्य आने वाले वर्षों में विश्व के शीर्ष 10 निर्यातकों में शामिल होना है। देश का मादक पेय पदार्थों का निर्यात 2023-24 में 2,200 करोड़ रुपये से अधिक रहा। प्रमुख निर्यात स्थलों में संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, नीदरलैंड, तंजानिया, अंगोला, केन्या और रवांडा शामिल हैं।