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India-UK FTA: कार-चॉकलेट से लेकर स्कॉच व मछलियों तक, जानें भारत-ब्रिटेन के समझौते से क्या-क्या सस्ता होगा?

Thu, 24 Jul 2025 10:19 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

India-UK FTA: भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते का लाभ दोनों देशों को मिलने वाला है। इस समझौते के बाद गोवा की फेनी, नासिक की कलात्मक वाइन और केरल की ताड़ी सहित भारत के अनूठे पारंपरिक मादक पेय पदार्थों को ब्रिटेन के बाजार में जगह मिलने वाली है। वहीं कार, चॉकलेट स्कॉच जैसे ब्रिटिश उत्पाद भारत में सस्ते होने वाले हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता - फोटो : PTI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान गुरुवार को भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए और उसे औपचारिक रूप दिया गया। इस दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारर्मर भी मौजूद रहे। इस समझौते पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उनके ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन रेनॉल्ड ने हस्ताक्षर किए। दोनों देशों को इस समझौते से क्या लाभ होगा आइए जानते हैं विस्तार से।

व्यापार समझौते से भारत को क्या लाभ होगा?

  • 26 ब्रिटिश कंपनियों ने भारत में नए कारोबार की घोषणा की है।
  • अब भारतीय उद्योग और लोग ब्रिटेन से निर्मित और आयातित चिकित्सा उपकरणों, एयरोस्पेस भागों तक बहुत सस्ती कीमत पर पहुंच सकेंगे।
  • शीतल पेय, सौंदर्य प्रसाधन, चॉकलेट, बिस्कुट, मेमना (मटन), सैल्मन (मछली) और कार जैसे ब्रिटिश उत्पाद भी भारतीयों के लिए आसानी से उपलब्ध और सस्ते हो जाएंगे, क्योंकि मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद औसत टैरिफ 15 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत हो जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ एक निश्चित सीमा के भीतर 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो जाएगा।
  • पीटीआई के अनुसार, व्यापार समझौते के लागू होने के बाद, ब्रिटिश कंपनियों के लिए भारत को व्हिस्की और अन्य उत्पादों का निर्यात करना आसान हो जाएगा। व्हिस्की पर आयात शुल्क तुरंत 150 प्रतिशत से घटकर 75 प्रतिशत और अगले 10 वर्षों में 40 प्रतिशत हो जाएगा। मुक्त व्यापार समझौते से देश के परंपरागत पेय पदार्थों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का रास्ता खुल गया है। गोवा की फेनी, नासिक की परंपरागत वाइन और केरल की ताड़ी जैसे अनूठे पारंपरिक पेय को ब्रिटेन के बाजार में जगह मिलने वाली है।
  • उत्पादों के अलावा, व्यापार समझौते से भारतीयों के लिए ब्रिटेन में रहना भी आसान हो जाएगा, क्योंकि फर्मों और फ्रीलांसरों को ब्रिटेन में 36 सेवा क्षेत्रों तक पहुंच प्राप्त होगी, और उन्हें किसी 'आर्थिक आवश्यकता परीक्षण' की आवश्यकता नहीं होगी।
  • भारतीय पेशेवर अब ब्रिटेन में बिना किसी कार्यालय के भी 35 क्षेत्रों में दो साल तक काम कर सकेंगे।
  • वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि इस कदम से हर साल 60,000 से ज़्यादा आईटी पेशेवरों को फायदा होगा। इस कदम से सबसे ज्यादा फायदा टीसीएस, इंफ़ोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और विप्रो को होगा।
  • समझौते के तहत भारतीय पेशेवरों को तीन वर्षों तक ब्रिटेन के सामाजिक सुरक्षा भुगतान से भी छूट दी जाएगी।
  • यह समझौता शेफ, योग शिक्षक, संगीतकार और अन्य अनुबंध-आधारित श्रमिकों जैसे पेशेवरों को ब्रिटेन के नौकरी बाजार में प्रवेश करने में भी मदद करेगा।

पहले और अब के टैरिफ में कितना बदलाव?

व्यापार समझौते से ब्रिटेन को क्या लाभ होगा?

  • इस समझौते से भारतीय टैरिफ में बड़ी कटौती होगी और 90 प्रतिशत टैरिफ़ लाइनों पर कटौती सुनिश्चित हो जाएगी। 10 वर्षों में, इनमें से 85 प्रतिशत टैरिफ़ से मुक्त हो जाएँगे।
  • ब्रिटेन के व्यवसायों को भारत में सार्वजनिक खरीद के अवसरों तक विस्तारित पहुंच प्राप्त होगी।
  • ब्रिटिश कंपनियां 2 अरब रुपये से अधिक मूल्य की गैर-संवेदनशील सरकारी निविदाओं पर बोली लगा सकेंगी। इसका मतलब है कि ब्रिटेन हर साल संभावित रूप से 40,000 निविदाओं में भाग ले सकेगा, जिनका कुल मूल्य लगभग 4.09 लाख करोड़ रुपये होगा।
  • व्यापार समझौते के प्रत्यक्ष परिणाम स्वरूप ब्रिटेन 2,200 से अधिक नौकरियां पैदा करने में सक्षम होगा।
  • ब्रिटेन के श्रमिकों को भी प्रति वर्ष 2.2 बिलियन पाउंड तक की वेतन वृद्धि मिलेगी।
  • ब्रिटिश लोगों को कपड़े, जूते और खाद्य उत्पादों पर सस्ती कीमतें और अधिक विकल्प मिलेंगे।
  • भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते में घोषित टैरिफ कटौती के कारण रोल्स रॉयस, बेंटले और एस्टन मार्टिन जैसे लक्जरी ब्रांड भारतीय बाजार में सस्ते हो जाएंगे।
  • व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ब्रिटेन के ऑटोमोबाइल ब्रांड दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में अधिक कारें बेचने की कोशिश करेंगे। इसका लाभ एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स) को मिलेगा। समझौते के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच कोटा के तहत मोटर वाहन आयात पर शुल्क वर्तमान 110 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत हो जाएगा।

ये भी पढ़ें: India-UK FTA: ब्रिटेन-भारत व्यापार समझौते से कारोबार में कम से कम 20 अरब डॉलर का होगा इजाफा, बोले अनिल अग्रवाल

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जीआई संरक्षण के साथ विकसित बाजारों में मिलेगी पहुंच
इसके साथ ही, भारतीय एथनिक एल्कोहलिक पेय को न केवल अपने पारंपरिक भौगोलिक संकेत (जीआई) संरक्षण का लाभ मिलेगा। साथ ही ब्रिटने जैसे विकसित बाजारों तक भी पहुंच प्राप्त होगी, जहां प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है। 

हॉस्पिटैलिटी जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में भी मिलेगा अवसर
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ये पेय अपने अनोखे स्वाद, विशिष्ट फ्लेवर प्रोफाइल और सांस्कृतिक विरासत के साथ ब्रिटिश टम्बलर्स में खास जगह बनाएंगे। उन्होंने कहा कि एफटीए से न केवल स्कॉच व्हिस्की और अन्य के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय शिल्प पेय को ब्रिटेन में जगह दिलाने में मदद मिलेगी, बल्कि हॉस्पिटैलिटी जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में भी ये नए अवसर तलाश सकेंगे।
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2030 तक एक अरब डॉलर का लक्ष्य
यह सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो वैश्विक बाजारों में भारतीय मादक पेय पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, यह एक नया क्षेत्र है। सरकार को उम्मीद है कि देश का मादक पेय पदार्थों का निर्यात वर्तमान 370.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक एक अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

भारत के पास वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी संभावनाएं
इससे पहले अप्रैल में, एपीईडीए (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) ने कहा था कि भारतीय मादक पेय पदार्थों की वैश्विक बाजारों में बड़ी संभावनाएं हैं। देश में दुनिया को देने के लिए जिन, बीयर, वाइन और रम सहित कई अच्छे उत्पाद हैं।

पेय पदार्थों के निर्यात में भारत 40वें स्थान पर
भारत वर्तमान में मादक पेय पदार्थों के निर्यात के मामले में विश्व में 40वें स्थान पर है। देश का लक्ष्य आने वाले वर्षों में विश्व के शीर्ष 10 निर्यातकों में शामिल होना है। देश का मादक पेय पदार्थों का निर्यात 2023-24 में 2,200 करोड़ रुपये से अधिक रहा। प्रमुख निर्यात स्थलों में संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, नीदरलैंड, तंजानिया, अंगोला, केन्या और रवांडा शामिल हैं।
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