Income Tax Slab Budget 2023-24: कितनी सैलरी पर कितना टैक्स
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यदि कोई कर्मचारी नियोक्ता को पसंदीदा कर व्यवस्था के बारे में सूचित करना भूल जाता है?
यदि कोई कर्मचारी अपने नियोक्ता को पसंदीदा कर व्यवस्था के बारे में सूचित नहीं करता है, तो नियोक्ता बजट 2023-24 में घोषित नई संशोधित कर व्यवस्था के अनुसार वेतन पर टीडीएस की कटौती करने लगेगा। सीबीडीटी के हालिया निर्देशों में नियोक्ताओं से कहा गया है कि वे अपनी कुल आय और टीडीएस की गणना करने के लिए कर्मचारियों से उनके पसंदीदा कर ढांचे के बारे में परामर्श करें। आर्थिक मामलों के जानकार विजय कृष्ण अग्रवाल के अनुसार इस महीने के अंत तक कर्मचारियों को अपने नियोक्ताओं को अपने पसंदीदा कर ढांचे के बारे में सूचित कर देना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करेंगे उनका नियोक्ता नई आयकर प्रणाली के तहत टीडीएस काट सकता है। इससे उन कर्मचारियों को नुकसान हो सकता है जिनके पास ऐसे निवेश हैं जो उन्हें पुरानी प्रणाली के तहत महत्वपूर्ण कटौती का दावा करने की अनुमति देते हैं। धारा 115 बीएसी पैराग्राफ 1 (ए) में उल्लिखित दरों पर नियोक्ता की ओर से स्रोत पर कर की कटौती की जा सकती है। अपना आईटीआर दाखिल करते समय कर्मचारी अपनी कर स्थिति का चयन कर सकते हैं, लेकिन अप्रैल महीने में अपने नियोक्ता को अपने पसंदीदा टैक्स स्लैब के बारे में सूचित नहीं करने से परेशानी हो सकती है।
नई कर व्यवस्था में पिछले वर्ष की तुलना में टैक्स स्लैब में किए गए बदलाव
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नई टैक्स रिजीम के तहत आयकर स्लैब
नई टैक्स रिजीम के तहत सात लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर कोई टैक्स देय नहीं होगा। 50,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी मंजूरी दे दी गई। बेसिक छूट सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया गया है। तीन से छह लाख रुपये सालाना की आमदनी पर पांच प्रतिशत, छह से नौ लाख रुपये की आमदनी पर 10 प्रतिशत, नौ से 12 लाख की आमदनी पर 15 प्रतिशत, 12-15 लाख की आमदनी पर 20 प्रतिशत और 15 लाख रुपये और उससे अधिक की आमदनी पर 30 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान है।
पुरानी टैक्स रिजीम के तहत आयकर स्लैब
पुरानी टैक्स रिजीम के तहत छूट और कटौती का फायदा मिलता है। इसके तहत मूल छूट सीमा यानी बेसिक एक्जेम्पशन लिमिट 2.5 लाख रुपये तक की है। कुल मिलाकर इस रिजीम के तहत पांच लाख रुपये तक की सालाना आमदनी वाले लोग टैक्स देने से बच जाते हैं। पुरानी रिजीम के तहत 2.5-5 लाख की आमदनी पर पांच प्रतिशत, 5-10 लाख की आमदनी पर 20 प्रतिशत और 10 लाख रुपये या उससे अधिक की आमदनी पर 30 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान है। इसलिए, उन सभी व्यक्तियों ने जिन्होंने अभी भी नई या पुरानी कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुना है, कृपया तुरंत चुन लें, अन्यथा डिफॉल्ट रूप से आपके लिए नई कर व्यवस्था लागू हो जाएगी।