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अगले एक साल में आ सकती है 2008 से ज्यादा खतरनाक मंदीः रिपोर्ट

Mon, 19 Aug 2019 01:50 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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recession - फोटो : Twitter
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अगले एक साल में पूरे विश्व में सबसे खतरनाक वैश्विक मंदी आ सकती है। यह मंदी 2008 वाली से ज्यादा बड़ी होगी, जिसकी शुरुआत होने की कई जगह से आहट मिलनी शुरू हो गई है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। 

34 फीसदी ने जताई आशंका

बैंक ऑफ अमेरिका ने विश्व के कई बड़े फंड मैनेजरर्स के बीच एक सर्वे दो से आठ अगस्त के बीच किया था। इस सर्वे में 34 फीसदी फंड मैनेजर्स ने माना है कि अगले एक साल में एक बड़ी मंदी आ सकती है, जो कि अक्तूबर 2011 के बाद सबसे बड़ी होगी। इस सर्वे में 224 फंड मैनेजर्स ने भाग लिया था। 

कंपनियां करें अपनी बैलेंस शीट में सुधार

सर्वे में माना गया है कि बड़ी कंपनियां अभी भी अपनी बैलेंस शीट को सुधारने का प्रयास नहीं कर रही हैं, जिसके चलते फिलहाल ऐसा हो सकता है। बड़ी कंपनियों को अपनी बैलेंस शीट सुधारने पर ध्यान देना चाहिए, न कि बायबैक और कैपेक्स बढ़ाने पर। 

व्यापार युद्ध की आशंका गहराई

अमेरिका की चीन, ईरान और भारत के साथ व्यापार युद्ध की आशंका गहराती जा रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह बड़ी चिंता की बात है। अगर व्यापार युद्ध आगे भी जारी रहता है तो फिर इसकी चपेट में कई देश आ सकते हैं। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसके अनुसार एशिया के तमाम देशों में इस वक्त अर्थव्यवस्था की रफ्तार अच्छी नहीं है। सिंगापुर, चीन, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में विकास दर काफी नीचे चली गई है। 

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भारत और चीन जैसे देशों का फिलहाल अमेरिका से व्यापार युद्ध चल रहा है। इससे उद्योगों पर काफी असर देखने को मिल रहा है। पिछले तीन महीनों में सिंगापुर की विकास दर केवल 3.4 फीसदी रह गई, जो कि 2012 के बाद के सबसे निचले स्तर पर है। वहीं चीन का आयात भी पिछले साल के मुकाबले 1.3 फीसदी घट गया है। निर्यात डाटा में भी 7.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।  वहीं दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था भी इस साल के पहली तिमाही में काफी घट गई थी। 

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- फोटो : Social

फैक्ट्रियों में ठप हुआ उत्पादन

मांग न होने की वजह से कई देशों ने अपनी फैक्ट्रियों में उत्पादन को बिलकुल बंद कर दिया है। कंपनियों के पास पुराना स्टॉक ही इतना ज्यादा पड़ा हुआ है कि उसको निकालने में अभी काफी समय लगने की उम्मीद है।

ऑटो सेक्टर का बुरा हाल

चीन और भारत में ऑटो सेक्टर का बुरा हाल देखने को मिला है। भारत में लगातार तीसरा महीना है, जब गाड़ियों की बिक्री में कमी देखने को मिली है। ऐसा ही हाल चीन का भी है। जून के आंकड़ों के मुताबिक चीन में वाहनों की बिक्री में 9.6 फीसदी की गिरावट आई है। चीन में पिछले 12 महीने से गाड़ियों की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

20.6 लाख वाहन तक गिरी बिक्री

चाइना एसोसिएशन ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (CAAM) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक गाड़ियों की बिक्री गिर कर 20.6 लाख वाहन तक पहुंच गई है। इस साल अप्रैल में 16.4 फीसदी और मई में 14.6 फीसदी की गिरावट आई थी। माना जा रहा है धीमी आर्थिक विकास दर और अमेरिका से चल रही ट्रेड वार के चलते यह गिरावट आ रही है।    

भारत में ऑटो कंपनियों के संगठन सियाम की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक जून में यात्री वाहनों की बिक्री 17.54 प्रतिशत घटकर 2,25,732 यूनिट्स की रही। जबकि साल जून, 2018 यह आंकड़ा 2,73,748 यूनिट था।     

सिंगापुर का घट गया निर्यात

सिंगापुर की अर्थव्यवस्था में निर्यात का काफी महत्वपूर्ण स्थान है। यह कुल जीडीपी का 176 फीसदी है। पिछले कुछ महीनों से यह काफी कम हो गया है और 2013 के स्तर पर पहुंच गया है। सिंगापुर के वित्त मंत्री हेंग स्वी कीट ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि सरकार ने इस बार जीडीपी के 1.5 फीसदी से 2.5 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद जताई है। सरकार पूरे मामले पर गंभीरता से नजर रखे हुए है। 

सिंगापुर का डॉलर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.1 फीसदी गिर गया है।

वैश्विक जीडीपी में 20 बीपीएस की कटौती

मॉर्गन स्टेनली ने मंदी की आहट को देखते हुए वैश्विक जीडीपी में 20 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है। एजेंसी ने 2019 के लिए तीन फीसदी और 2020 के लिए विकास दर को 3.2 फीसदी रखा है। 
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