फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

NBFC: आपात स्थिति में एनबीएफसी से 3 महीने के अंदर निकाल सकते हैं पूरा FD, RBI ने कहा- नहीं मिलेगा कोई ब्याज

Tue, 13 Aug 2024 06:35 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एनबीएफसी में एफडी करवाने वाले निवेशकर अब आपात स्थिति में तीन महीने के अंदर पूरा पैसा निकाल सकेंगे। आरबीआई ने इसको लेकर आदेश जारी कर दिया है। हालांकि आरबीआई ने यह भी कहा है कि समय पूर्व निकासी पर कोई ब्याज नहीं मिलेगी। 
विज्ञापन
fixed deposit new fd - फोटो : istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

 एनबीएफसी में पैसा जमा करने वालों को बड़ी राहत मिली है। अगर जमाकर्ता किसी आपात स्थिति में रकम की निकासी चाहता है तो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां यानी एनबीएफसी फंड स्वीकार करने के पहले तीन महीनों के भीतर जमा राशि का 100 प्रतिशत भुगतान करेंगी। आरबीआई ने कहा, इस तरह की समयपूर्व निकासी के लिए ग्राहक को कोई ब्याज नहीं मिलेगा। यह नियम एक जनवरी, 2025 से लागू होगा।
विज्ञापन


भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने सोमवार को कहा, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडाई) द्वारा निर्धारित गंभीर बीमारी की परिभाषा यह तय करेगी कि ग्राहक की मांग इस श्रेणी के तहत योग्य है या नहीं। आपात स्थितियों के खर्चों में चिकित्सा या प्राकृतिक आपदाओं या सरकार द्वारा अधिसूचित आपदा जैसे खर्च शामिल होंगे।

यदि कोई आपात स्थिति नहीं है फिर भी तीन महीने के भीतर पैसा निकाला जाता है तो एनबीएफसी बिना किसी ब्याज के जमा राशि का 50 प्रतिशत तक भुगतान कर सकती हैं। हालांकि, जमा की मूल राशि का 50 प्रतिशत से अधिक या 5 लाख रुपये, जो भी कम हो, समय से पहले भुगतान नहीं किया जा सकता है। आरबीआई ने एनबीएफसी को जमाकर्ताओं को परिपक्वता के बारे में 14 दिन पहले सूचित करने के लिए भी कहा है। वर्तमान नियमों के अनुसार यह अवधि दो महीने की है।
विज्ञापन


'भारत 2047 तक 55 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है'
भारत 2047 तक 55 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। इसके लिए केंद्र और राज्यों को जरूरी नीतियां लागू कर वृद्धि दर को 8 फीसदी तक ले जाना होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के कार्यकारी निदेशक कृष्णमूर्ति वी सुब्रमण्यन ने सोमवार को कहा, यह लक्ष्य दुस्साहसी लग सकता है, लेकिन चक्रवृद्धि की शक्ति के जरिये इसे हासिल करना संभव है। सुब्रमण्यन ने अपनी पुस्तक ‘इंडिया ऐट 100’ के अनावरण पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, देश का निजी कर्ज एवं जीडीपी अनुपात 2020 में 58 फीसदी था। यह उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से करीब छह दशक पीछे है और ये देश अब 200 फीसदी पर हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री जन-धन जैसी योजनाओं के जरिये वित्तीय समावेशन के मामले में अभूतपूर्व काम किया जा रहा है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें