बजट में सोने सहित अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ने से गैरकानूनी गतिविधियों में इजाफे की आशंका को दूर करते हुए वित्त सचिव ने कहा कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है। उन्होंने उद्योग से जुड़े संगठनों को आश्वस्त किया कि सरकार ने शुल्क बढ़ाने से पहले ही तस्करी जैसे जोखिमों का पहले ही आकलन कर लिया था।
बता दें कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने के एक दिन बाद ही इसकी कीमतें पांच साल के सबसे शीर्ष स्तर पर पहुंच गईं। सोने के भाव 35 हजार के पार चला गया था। वहीं चांदी की कीमतों में भी 280 रुपये की तेजी देखी गई।
अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद के चेयरमैन एन. अनंत पद्मनाभन ने कहा कि आयात शुल्क और जीएसटी की दरों में इजाफा होने से घरेलू बाजार में सोने के दाम 15.5 फीसदी तक बढ़ जाएंगे। इसके अलावा गैरकानूनी कारोबार भी 30 फीसदी तक बढ़ने की आशंका है, जहां ग्राहकों को चार से पांच फीसदी की छूट मिलती है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) के भारतीय परिचालन के प्रबंधन निदेशक सोमसुंदरम पीआर ने कहा कि सोने की कालाबाजारी बढ़ाने से सरकार के नकद लेनदेन के प्रयासों की सफलता पर भी असर होगा।
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवद्धन परिषद के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल का कहना है कि आयात शुल्क में इजाफे से घरेलू कारोबारियों को सोना मंगाना महंगा पड़ेगा। इस वजह से स्थानीय कारोबारी अपना व्यवसाय पड़ोसी देशों में ले जाने पर मजबूर हो जाएंगे। भारत अभी दुनिया का सबसे बड़ा स्वर्ण आयात देश है। 2018-19 में भारत ने 2.11 लाख करोड़ रुपये का सोना आयात किया है।